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________________ ! उपदेश ॥ ए८ ॥ पाती मिरासपामोयगाईहिं । दिघार्ज सुदुविदिषा दाल दिंती सीए ॥ ७३ ॥ तहवि न गिरइंति बहुं मुहुं मुहुं न य मुहं पलोयंति । जश्णो इरियासमिया नीरागा एसएासत्ता ॥ ८४ ॥ सवियारासुविवियार माणसा साणो इमे धन्ना । मणयं न रागखेसो जेसिं न उस श्रीसु ॥ ८५ ॥ श्व्अयं पुणो अधन्नो नमीविमोहेण विनमि निविमं । नहं करेमि पुराउं पुरपदुणो इत्यिोस्स ॥ ८६ ॥ अजसो भए न गणित इणि य कुलकमो कुसंगेण । धिदी मं न मुझे बुद्धी जस्सेरिसी जाया ॥ ८१ ॥ इंसुले कुले मे लग्गो मसिकुच मद्दाम लियो । एएए डरायारावरणेणं निंद विक्रेण ॥ ८८ ॥ को मम्मुहं पलोय खोजे सोलदएण किएड्यरं । जो धन्नो कयपुन्नो तहा श्रवन्नोदया जीरू ॥ ६५ ॥ सो सोऽवि कार्ड जार्ज कुकम्मदोसेश । जेण नमी सुकुमी विठु समीदिया जोतुं ॥ ४० ॥ मम पुत्रमहो मतोऽधि नियो नमी जो सत्तो । सुबसु बसुवि सुंदरीसु रुवेण संतीसु ॥ ७१ ॥ जस्सागुरोगा संजोगा सयण मित्तवग्गरस । सोऽवि श्रहो ! सुमो पईए नीयनारीए ॥ ९२ ॥ नारी हिँन के नकिया चकिया जे गोरखंमि इत्य जए । तेऽवि हु घसति प्रकिया मोहमहापाला || ९३ ।। धणजुबदरणेणं रिजूचा जा समम्गलोयस्स । सा नरित्ति कदं न जलिया सत्रे वियदेहिं ॥ ९४ ॥ एए पुण कयपुन्ना समग्गसत्तेमु धरियकारया । समतण मणी हिरक्षा समणा छत्तमकुलुप्पन्ना || ए५ ॥ १ न अरिरिति 196 सष्ठ विका. ॥ ए ॥
SR No.090458
Book TitleUpdeshsaptatika
Original Sutra AuthorN/A
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages498
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Sermon
File Size13 MB
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