SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 105
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ भी तपासादांग सूत्र-- अग्गिमित्ता मारिया सहालपुत्तस्स समणोवासगस्स "नहत्ति" प्यमहं विणण्ण पडिसुणे।। अर्थ-धर्मकथा सुन कर मानन्दजी की मांति सभडालपुत्र ने भी श्रावक के बारह पत स्वीकार किए । विशेषता यह है कि पांचवें परिग्रह-परिमाण में एक करोड़ स्वर्णमा निधान में, एक करोड़ घ्यापार में तथा एक करोड़ की धर-बिखरा और देस हजार गार्यों का एक ब्रज, इसके उपरांत परिग्रह का त्याग किया। व्रत ग्रहण कर श्रमण भगवान महावीर स्वामी को वंदना नमस्कार किया और अपने घर वा कर अग्निमित्रा मार्या से कहा-"हे देवानुप्रिए 1 श्रमण भगवान महावीर स्वामी यहाँ बिराजमान हैं। तुम जाओ, बंबना नमस्कार यावत् पर्युपासना करो। पांच अणवत और सात शिक्षाप्रत रूप धावकधर्म स्वीकार करो।' अग्निमित्रा भार्या में सफडालपुत्र की बात विनयपूर्मक स्वीकार की। अग्निमित्रा श्रमणोपासिका हुई तए णं से सहालपुत्ते समणोवासए कोषियपुरिसे महाद, महादेत्ता एवं पयासी-"खिप्पामेव मोदेवाणुप्पिया लहुकरणजुत्तजोऽयं समरखरपालिहाणसमलिहियसिंगरहिं जंबूणयामयकलावजोत्तपइपिसिएहिं रपयामपघंटसुत्तरज्जुगवर कंचण-खड्यणत्यापग्गहोग्गहियएहिं णीलप्पलकयामेलएहि पवरगोणजुवाणा णाणामणिकणमघंटियाजालपरिगपं सुजाय गजुत्तउज्जुगपसस्थसुविसपम्मियं पवरलक्षणोक्वेयं जुत्तामेव धम्मियं जाणप्पवर उवट्ठवेह, उववेत्ता मम श्यमाणसिय पच्चपिपणह । तए णं ते कोबियपुरिसा जाब पच्चप्पिणति । अर्थ-तम सालपुत्र में अपने कर्मचारियों को बुला कर कहा-"शीघ्र ही शीघ्रगति वाला रथ उपस्थित करो, जिसमें जोते जाने वाले बल वक्ष, खर तक लम्बी पंछ वाले, सरीले सोंगों वाले, गले में सुनहरे आभूषण पहने हुए, सुनहरी नक्काशीवार जोत घाले, गले में लटकते हुए चांदी के घर वाले, सुनहरी सूत की नाय से बंधे हए, मस्तक पर मील कमल के समान कलंगी धारण किए हुए हों और युवावस्था वाले हों।" कर्मचारियों ने आमानुसार कार्य कर आमा प्राप्त की।
SR No.090457
Book TitleAgam 07 Ang 07 Upashakdashang Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhisulal Pitaliya
PublisherAkhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh
Publication Year
Total Pages142
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Literature, & agam_upasakdasha
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy