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६॥
|| तीसरा
मो धरहंताणं
सिद्धार्थ
ही सभो
मो
ॐ ह्रौं णमो ॐ हः यमो ॐ देवय असा रक्खंतु मे शरीरं, देवासुर
गन्यास ॥
वाइरियाणं
उवज्झायाणं लोए सव्व साहूणं स्वाहा ( वाम पृष्ठे ) बांये
अट्ट सहस्सा अड कोड़िउ पण मिया सिद्धाय स्वाहा ||
स्वाहा
( दक्षिण जे )
स्वाहा ( वाम भुजे )
स्वाहा ( नाभि मंडले )
स्शहा ( दक्षिणा पृष्ठे ) दाहिने पछवाड़े
पछवाड़े
हस्त निर्मली करण् मंत्र 10
ॐ ह्रीं मरता श्रुतांगदेवी प्रशस हस्ते हीँ फट् स्वा
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इत्यंगन्यासः ||
इतिहस्त निर्मलीकरणम्
हृदय शुद्धि मंत्र
ॐ ह्रींनी सर्वपाप क्षयंकरी श्रुतज्ञानदेवी हन दन दह दह ताँ दीं हूँ क्षौ चः दीर धवले तसं ह्रस्वाहा काय शुद्धिमहे साहा ।
( इति हृदय शुद्धिः )