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[ गो. प्र. चिन्तामणि
तिचिनी मनुध्वणी देवांगना अचेतन
चार प्रकार की स्त्रियां
मन
।
काथ
योगों से त्याग
| कारित अनुमोदना
कृत कारित अनुमोदना से
पईन । रसना
घ्राण वक्षु
श्रोत १४४
१०८
इन्द्रियों से
स्ना०
१०
राम० हंसी । सुभीत विषय ! दपंख ! शो० । स्मः | सिक ३६०। ५४ ७२००० १०८।१२६० ! १४४०] १६२०
मिलाप देखना । सस उन्मत्त प्राण संदेह वीर्यपात दुस दाह | अरुचि | मूळ
१८०० ३६०० ।५.५००।७२००१००० | १०००/१२६००१४४०० १६२००
इनके सिवाय और प्रकार से भी १८००० भेद होते हैं । अचेतन स्त्रियां तीन प्रकार हैं--काठ की बनी, पत्थर की बनी और रंग की बनी । इनका त्याग मन, वचन से किया जाता है तथा कृत कारित अनमोदना से किया जाता है। सो तीन को मन, वचन से गुस्सा करने से ६ तथा कृत कारित अनुमोदना से गुणा करने से १८ भेद होते हैं । इनका त्याग पांचों इन्द्रियों से किया जाता है सो ५ से गुणा करने से ६० भेद हो जाते हैं। इन १० का त्याग दोनों द्रव्यभावेन्द्रियों से किया जाता है, सो २ से गुणा करने से १८० भेद हो होते हैं। इन १८० का त्याग चारों कषायों से किया जाता है, इसलिये ४ से गुणा करने से ७२० भेद हो जाते हैं। ये अचेतन स्त्रियों के त्याग के भेद हुए । तथा चेतन स्त्रियां ३ प्रकार की हैं-मनुष्यणी, देवी, तिर्यंचनी । इनका त्याग मन, वचन, काय से तथा कृत कारित अनुमोदना से इन ७ से किया जाता है इसलिये ७ से गुणा करने से २७ भेद होते हैं । इवको पांच द्रव्येन्द्रिय और