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________________ १०० ] [ गो. प्र. चिन्तामणि तिचिनी मनुध्वणी देवांगना अचेतन चार प्रकार की स्त्रियां मन । काथ योगों से त्याग | कारित अनुमोदना कृत कारित अनुमोदना से पईन । रसना घ्राण वक्षु श्रोत १४४ १०८ इन्द्रियों से स्ना० १० राम० हंसी । सुभीत विषय ! दपंख ! शो० । स्मः | सिक ३६०। ५४ ७२००० १०८।१२६० ! १४४०] १६२० मिलाप देखना । सस उन्मत्त प्राण संदेह वीर्यपात दुस दाह | अरुचि | मूळ १८०० ३६०० ।५.५००।७२००१००० | १०००/१२६००१४४०० १६२०० इनके सिवाय और प्रकार से भी १८००० भेद होते हैं । अचेतन स्त्रियां तीन प्रकार हैं--काठ की बनी, पत्थर की बनी और रंग की बनी । इनका त्याग मन, वचन से किया जाता है तथा कृत कारित अनमोदना से किया जाता है। सो तीन को मन, वचन से गुस्सा करने से ६ तथा कृत कारित अनुमोदना से गुणा करने से १८ भेद होते हैं । इनका त्याग पांचों इन्द्रियों से किया जाता है सो ५ से गुणा करने से ६० भेद हो जाते हैं। इन १० का त्याग दोनों द्रव्यभावेन्द्रियों से किया जाता है, सो २ से गुणा करने से १८० भेद हो होते हैं। इन १८० का त्याग चारों कषायों से किया जाता है, इसलिये ४ से गुणा करने से ७२० भेद हो जाते हैं। ये अचेतन स्त्रियों के त्याग के भेद हुए । तथा चेतन स्त्रियां ३ प्रकार की हैं-मनुष्यणी, देवी, तिर्यंचनी । इनका त्याग मन, वचन, काय से तथा कृत कारित अनुमोदना से इन ७ से किया जाता है इसलिये ७ से गुणा करने से २७ भेद होते हैं । इवको पांच द्रव्येन्द्रिय और
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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