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________________ । ८७४ ] [ गो. प्र. चिन्तामणि पाराधनागतं क्षेमं क्षपकस्य समीयुषः । । दिव्येन निःप्रमादोऽसौ निमित्तेन परीक्षसे ॥१८०६॥ खवगस्स झपकस्य, उपसंपण्यास अत्मांतिकमुपाश्रितस्य । तस्स तस्य । याराहरणा अविक्खेवं पाराधनाया अविक्षेपं । पडि लेहदि परीक्षते । कः ? सो स सूरिनिर्यापकः । अप्पमत्तो अप्रमत्तः । केरण दिवेण देवतोपदेशेन । रिममित्तेरण निमित्तेण वा इयमेका परीक्षा। हमारे संघ के इस क्षपक ने समाधि के लिए आश्रय लिया है, इसकी समाधि निर्विघ्न समाप्त होगी या नहीं, इस विषय का भी आचार्य देवता के उपदेश से अथवा शुभाशुभ निमित्तों से निर्णय कर लेते हैं। यह भी एक परीक्षा है ! साधु की आलोचना आचार्य कहां सुनें अरहंत सिद्ध सागर पउसरं रवीरंपुष्फ फल भरियं । उज्जारा भवरण तोरण पासादं गागजक्ख घरं ॥१८०७॥ जिनेन्द्र यक्ष नागादि मंदिरं चारू तोरणम् । सारः स्वच्छ पयः पूर्ण पद्मिनी फंड मंउितम् ॥१०॥ पागजखघरं । नागानां यक्षाणां च गृहं । अर्हन्त का मन्दिर, सिद्धों का मन्दिर, अर्हन्त और सिद्धों की जहां प्रतिमा है, ऐसे पर्वतादिक, समुद्र के समीप का प्रदेश, जहां क्षीर वृक्ष हैं, जहां पुष्प और फलों से लदे हुए वृक्ष हैं ऐसे स्थान, उद्यान तोरणद्वार सहित मकान, नागदेवता मन्दिर, यक्ष मन्दिर ये सब स्थान क्षपक की पालोचना सुनने के योग्य हैं। भगवति प्रा. (म.प्रा.) प्रा. शिवकोटि (शिवार्य) । उपरोक्त विवरण से ये मालूम पड़ता है कि दिगम्बराचार्य भी इन विद्या, मन्त्रों व देवता का सहारा लेते थे विशेष कार्य के लिये, और आलोचना भी यक्षों के मन्दिरों में जाकर सुनते थे । अगर ये यक्ष मिथ्यादृष्टि होते तो इनसे क्यों पूछते अथवा इनके मन्दिर में प्राचार्य लोग क्यों जाते, मिथ्यादृष्टिों के मन्दिर में जाना ही हमारे यहां निषेध है अथवा मन से, वचन से, काय से मिथ्यादृष्टि देवों को मान्यता देना अनायतन सेवा है। अनायतन रोवने वाला कभी सम्यग्दृष्टि नहीं हो सकता। इससे सिद्ध होता है कि ये देवी देवता सम्यग्दृष्टि ही हैं और इनकी योग्यतानुसार इन देवीदेवताओं का सन्मानादि करना ही चाहिए । वीतराग भगवान की पूजा-पञ्चोपचारी
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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