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________________ A ५४० [ गो. प्र. चिन्तामणि "शिरःमुखस्मश्रुलोचोप्रधकेशरक्षणमिति" इसी प्रकार इन्द्रनंदी सिद्धान्त चक्रवर्ती ने नीतिसार में लिखा है। "अचेलत्वं शीर्षकूर्चलोचोऽधः केशधारणमिति" इस प्रकार जानना । । प्रश्न :----मुनिराज के लोच की विधि तो जानी, परन्तु तीर्थकर भगवान दीक्षा समय जो पंचमुष्टी-लोच करते हैं। सो किस प्रकार करते उत्तर :---. 'तीर्थकर भगवान मुनियों के समान लोंच नहीं करते, क्योंकि उनके दाढ़ी, मूछ होते ही नहीं है । तीशंकर भगवान तो सदा सोलह वर्ष की अवस्था वाले पुरुष के समान (बिना दाढ़ी मूंछ के) अपने रूप से सुशोभित रहते हैं। इसलिये भगवान जो पंचमुष्ठी लोच करते हैं । सो केवल शिर का ही पंचमुष्यिों का लोच करते हैं । यदि ऐसा नहीं माना जायेगा तो मुनिराज के समान तीर्थंकरों का केशलोंच बन ही नहीं सकेगा, क्योंकि उनके दाढ़ी मूछ के केश लोंच करने योग्य होते ही नहीं हैं । फिर भला उनक लांच की संभावना हो हो कैसे सकती है ? लिखा भी है-- देवाणि-रसारया विय भोगभवा किकजिणवीरंदारण। सम्वे केसव रामा कामा विरिणकुचिया हुति ॥१६६८।। अर्थात् चतुर्णिकाय के देव, नारकी जीव, भोग भूमियां चक्रवर्ती तीर्थकर नारायण, बलभद्र और कामदेवों के मुख पर दाढ़ी मूंछों के बाल नहीं होते हैं । . .भावार्थ-इन सबके हमेशा नवयौवन, अवस्था बनी रहती है । नारकी जीवों को छोड़कर बाकी के ऊपर लिखे सभी जीवों के केवल शिर के बाल होते हैं। सो भी १६ वर्ष वाले पुण्य पुरुष के समान सुशोभित रहते हैं । अन्य साधारण पुरुषों के समान न तो विशेष उत्पन्न होते हैं और न विशेष बढ़ते हैं । केवल शोभारूप उत्पन्न होते हैं । और शोभा रूप ही बढ़ते हैं, इसलिये ऊपर लिखे जीवों के क्षौरकर्म (बाल कर्म) नहीं होता है । अर्थात् तीर्थंकरादि बाल नहीं बनवाते, क्योंकि वे इतने बढ़ते ही नहीं है। इसके सिवाय एक और बात यह भी है. कि यदि तीर्थंकरों के मुख पर बाढ़ी, मूंछ के बाल माने जाये तो उनकी प्रतिमा में दाढ़ी, मूछ के बाल मानने पड़ेंगे परन्तु । ऐसा है नहीं, इसलिये तीर्थकरों के दाढ़ी, मुंछ का अभाव ही है । जिन प्रतिमा में दाढ़ी, मूंछ के बालों के साथ भौह के बालों का भी निषेध है। लिखा PARAN
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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