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अपार : पहला.....
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सत्यासी बाकी रहे, तब बंध का अवसर प्राता है । अगर यहां भी प्रायु नहीं बंधी तो फिर इवकइससी सत्यासी का त्रिभाग करे । उसका त्रिभाग सातसो
उनतीस बाकी रहेगा अगर इसमें भी प्रायु नहीं बंधी तो फिर विभाग करे । ... उसका विशाग दो सौ तैतालिस बाकी रहे, तब आयु बंध होता है । अगर . ... इसमें भी नहीं बंधी तो, फिर विभाग करे । बाकी रही इवयासी - इस .. प्रकार त्रिभाग करते जाय । शेष सताइस इसका त्रिभाग है, इसका त्रिभाग
३, इसका त्रिभाग एक रहता है -- इस प्रकार पाठ बार आयु बंधने का समय माता है । इसमें भी नहीं बंधी तो मरण के अन्त समय में निश्चित ही
आयु बंधती है। विभाग बिना इस जीव के प्रायु का बंध नहीं होता है। प्रश्न :-गुरणस्थानों का गमनागमन किस प्रकार है ? ... . उत्तर :--- मिथ्यात्व गुग्गस्थान के मार्ग चार हैं । प्रश्रम मिथ्यात्य से निकल कर तीसरे
. गुगास्थान तक जाता है । द्वितीय कोई जीव मिथ्यात्व से चौथे गुरपस्थान
तक जाता है । तृतीय कोई जीव मिथ्यात्व से निकलकर पांचवें गुरगस्थान में जाता है। चतुर्य कोई जीव मिथ्यात्व से. सातवें गुणस्थान तक जाता है
यह मिथ्यात्व गुणस्थान का मार्ग जानना। .... दूसरे सासादन गुणस्थान का एक मार्ग है । सासादन गुग्गस्थान से
च्युल जीव मिथ्यात्व गुणास्थान में हो पाता है, अन्यत्र कहीं भी नहीं ..:. जाता है। . . . . . . . . . . . . .
: तीसरे मिथः गुणस्थान के दो मार्ग हैं। मिश्र से ऊपर चढ़े तो चौथे में जाता है और नीचे गीरे तो पहले गुशास्थान में प्राता है। .
चौथे गुणास्थान के पांच मार्ग हैं । चौथे गुणस्थान से नीचे गोरे तो
प्रथम मिश्र मुणस्थान में आता है । द्वितीय टूसरे सासादन गुणस्थान में .... पाता है। तृतीय प्रथम गुणस्थान में आ जाता है - ये तीन मांगे तो
गीरने की अपेक्षा से है और चौथे गुगास्थान से उपर चढ़े तो पांचवें अथवा सातवें गुणस्थान में पहुंच जाता है । ये पांच मार्ग है ।
पांचवे देशवत गुणस्थान के पांच : मार्ग हैं। पांचवें गणस्थान से 6. ऊपर छुढे तो सातवें गुणास्थान अप्रमत्त में जाता है। पांचवें से नीचे गहीरे .
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