________________
अध्याय: दसवां ]
संक्रान्ति के न होने से उपयोगात्मक ज्ञान को भी निर्विकल्पक कहा गया है ।
पूजा ।
द्रव्य पूजा
प्रश्न : श्रावकों को जिनाभिषेक व जिनपूजा किसप्रकार करना
--
चाहिये?
उत्तर :- पूजा चार प्रकार की है, द्रव्य पूजा, क्षेत्र पूजा, काल पूजा, भाव
नव्वेरपय दव्वस्य जा पूजा जागदव्यपूजा सा ।
दरण मंथ - सलिलाइन भरिए कार्यव्वा ।।१६७५।।
[ ८३५
जलादि द्रव्य से प्रतिमादि द्रव्य की जो पूजा की जाती है, उसे द्रव्य पूजा जानना चाहिये । वह द्रव्य से अर्थात् जल-गंध प्रादि पूर्व में कहे गये पदार्थ समूह से ( पूजन सामग्री से ) करनी चाहिये ।
तिविहा बव्वेपूजा सच्चित्ताविस मिस्स भएन । पञ्चक्ख जिलाई सचित्तपूजा जहाजोगं ॥१६७६॥ तेस व सरीराणं वन्दसुदस्स वि श्रचितपूजा सा! atrator कोरइणान्वा मिस्सपूजा सा ॥१६७७॥
द्रव्य पूजा तीन प्रकार की है- सचित, प्रति और मिश्र । प्रत्यक्ष उपस्थित जिनेन्द्र भगवान् और गुरु यादि का यथायोग्य पूजन करना सो सचित्त पूजा है । उनके अर्थात् जिन तीर्थंकर आदि के शरीर की और द्रव्यश्रुत अर्थात् कागज आदि पर fafe बद्ध शास्त्र की जो पूजा की जाती है, वह अचित्त पूजा है । और जो दोनों का पूजन किया जाता है वह मिश्र पूजा है ।
क्षेत्र पूजा-
जिस जम्मर-रिपक्खमणेराजुप्पत्तीए तित्थमिहेसु शिसिहोसुरयेत पूजा पुच्वविहाणेण कायन्वा
।।१६७६।।
जिन भगवान् की जन्म कल्याणक भूमि, दीक्षा भूमि, ज्ञानकल्याणक भूमि, निर्वाण भूमि आदि स्थानों की, तीर्थ, चिन्ह स्थान और निषिधिका स्थानों की पूर्वोक्त fafa से पूजा करना यह क्षेत्र पूजा है ।