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________________ NRNALINE StarPASSEE SCSTIANE ८१४ ] [ गौ. प्र. चिन्तामणि में से लाकर भरत क्षेत्र में रखेंगे। अयोध्या के स्थान पर सदा शाश्वतिक रहने वाला कमल को देखकर इन्द्र फिर से अयोध्या की स्थापना करता है और शिखर जी के स्थान पर क्रमुकाकार (सुपारी २४ टोकों को देखकर वहां शिखर जी पहाड़ की इन्द्र रचना करता है । ये कमल और सुपारी के आकार अयोध्या के स्थान पर और शिखर जी के स्थान पर रहते हैं। मिताभूमि पर रहते हैं, में विन्द कभी नष्ट नहीं होते हैं । नित्य और शाश्वतिक हैं। प्रश्न-राजु का प्रमाण कितना है ? उत्तर-एक प्रांख की टिमकार का जितना काल है, उतने समय में एक देव असंख्यात योजन जाता है, ऐसी तीव्र गति की चाल चलने वाला देव यदि ६ माह तक लगातार चलता ही रहे, जहाँ छः माह पूर्ण होंगे, उतना १ राजु का प्रमाण है। प्रश्न--सप्तम नरक की लम्बाई और चौड़ाई का क्या प्रमाण है ? उत्तर-स्वयम्भू रमरा समुद्र के पूर्व किनारे पर से तथा पश्चिम, उत्तर, दक्षिण किनारों से अलग-अलग रस्सी लटकाई जायेगी तो प्रत्येक का किनारा क्रमश: उस सप्तम भूमि के रीर व महारोर व ग्रादि ४ बिलों के ठीक बीचों बीच पड़ेगी। प्रश्न-शिखर जी पहाड़ को कोतने लाख व्यन्तर देव सेवा करते हैं ? उत्तर- सम्मेदाचल की दश लाख व्यन्तर देव सेवा करते हैं और उन व्यन्तरो का अधिपति महाप्रभूत नाम का इन्द्र है, सो भी शिखर जी का रक्षक है । __ 'शिखर महात्म्य' प्रश्न- तीन सौ श्रेसठ पाखण्ड़ों का क्रस क्या है ? उत्तर-८४ क्रियावादी, मिथ्यादृष्टि १८० प्रक्रियावादी, ६७ प्रज्ञानवादी, ३२ बैनयिक, ये सब मीलाकर ३६३ पाखण्ड हो जाते हैं ।। प्रश्न--६ महिने ८ समय में कितने जीव मोक्ष जाते हैं ? उत्तर-अतीत काल के जितने समय हैं, उनको ५६२ से गुरणा करना, उसमें ६ माह और ८ समय का भाग देना जो गणित आवे उतने जीव मोक्ष जा सकते हैं। कम से कम ६०८ जीव मोक्ष जाते हैं। अतीत समय अनन्तानन्त x ५६२:६ माह ८ समय:- अनन्तानन्त ।। ६ माह ८ समय के अनन्त समय भी माने जाय तो अनन्तानन्त : ५६२ होंगे। तिलोय प. मा. नं. २६०७ ARTED SASARAMES
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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