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________________ mindianhindiante अध्याय : दसवां । [ २१५ प्रश्न :--पांच पैताले कौनसे हैं ? उत्तर :-..--१. प्रथम स्वर्ग का ऋजुविमान, २. प्रथम नरक का सोमंतकपाथडा, ३. ढाइद्वीप, ४. सिद्धशिला, ५. सिद्धक्षेत्र । .. प्रश्न :-वेक्षक सम्यक्त्व को ६६ को स्थिति किस प्रकार होती है ? उत्तरः ---सौधर्म द्वी सागरो, शुक्र षोडस सागराः, शतारे अष्टादश सागराः अष्टम ग्रेवेयके त्रिंशत्सागराः एवं षट्षष्टि सागराः । । अथवा--सोधर्म द्विरूत्पन्नस्य चत्वारः सागराः सनत्कुमारे सप्तसागराः ब्रह्मरिण दशसागरा: लान्तवे चतुर्दशसागराः नववर्गवेयेकेषु एकत्रिंशत्सागराः एवं षटषष्टिसागरा: । अन्त्य सागर शेषे मनुष्यायु हीनं क्रियते तेन षटषष्टि सागराः साधिकान भवन्ति । तत्वार्थ वृत्ति पृ. १२ प्रश्न :--क्या इन्द्र के पहले इन्द्राणी मोक्ष जाती है ? उत्तर :- हां इन्द्र के पहले इन्द्राणी मोक्ष जाती है और एक नहीं कई मोक्ष चली जाती हैं, तब इन्द्र का नम्बर प्राता है । क्योंकि इन्द्र की आयुष्य तो सागरों की रहती है और इन्द्राणियों की आयु पल्यों की रहती है। प्रश्न :--एक इन्द्र के काल में कितनी इन्द्रारिणयां मोक्ष जाती हैं ? उत्तर :-- इन्द्र की आयु का प्रमाण कुछ अधिक दो सागर प्रमाण है और इन्द्राणी की आयु पांच पल्य की होती है। अतः एक इन्द्र के काल में चालीस नील इन्द्राणियां मोक्ष जाती हैं, .:. १ सागर प्रमाण में १० कोटा-कोटी पल्य २ , , , १०x२, ४-२०,०००००००००००००००५ =४०००००००००००००० नील इन्द्रारिणयां मुक्त होगी। प्रश्न :--जब इतनी इन्द्रापियां मुक्त होती हैं, फिर कितने लोकपाल मोक्ष जाते हैं ? उत्तर :-.ये लोकपाल भी भगवान के समवशरण में सभा की व्यवस्था करते हैं, इसलिये ये भी एक भवावतारी होते हैं-- दिशा-पूर्व-दक्षिण-पश्चिम-उत्तर नाम--- सोम---यम-~-चरूणा-कुबेर आयु-२॥ पल्य--२॥ पल्य--२॥ पल्य-३ पल्य
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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