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________________ ८१२ ] [ गो. प्र. चिन्तामणि ४. सुवा कपिल निशाटिल ५. सुजात (संजातक) सूरज देवसेन ६. स्वयंप्रन चन्द्रमा मित्रभूत ७. ऋषभानन हरि कीरत ८. अनन्तवीर्य गज मेघ ६. सुरप्रभ (सूर्यप्रभ) सूर्य नागराय १०. विशालकीति चन्द्रमा विजमुराय ११. बज्रधर शंख पद्मरथ १२. चन्द्रानन वृषभ वाल्मीकि १३. भद्रबाहु (चन्द्रवाह) पथ देवनन्दो १४. भुजंगम चन्द्रमा महाबल १५. ईश्वर सूर्य गलसेन १६. नेमप्रभ (नमि वृषम बोरोन १७. वीरसेन ऐरावत भोपाल भुवपाल १८. महाभद्र चन्द्रमा देवराज १६. देवयश (यशकीति) साथिया श्रवभूत २०. अजितवीर्य पा सुबोध सुनन्दा अलकापुरी सेना विजया सुमंगला सुषीमा वीरसेना अयोध्या सुमंगला विजया भद्रा पुडरीकिरणी विजया सुसीमा सरस्वतो पुण्डरीकिरणी पद्मावती विनीता सुरेणुका विजया महिमा सुसीमा ज्वाला अयोध्या सेना पुण्डरीकिणी सुभानुमति विजया उमादेवी सुसीमा गंगादेवी अयोध्या कनका अयोध्या प्रश्न--जिनालय से मानस्तंभ कितना बड़ा होना चाहिये ? उसर-मानस्तम्भ मूल नायक प्रतिभा से १२ गुणा बड़ा बनाना चाहिये । किसी प्राचार्य के मत से जिनालय से १ हाथ ऊंचा होना चाहिये। .... प्रश्न--पyषस किसे कहते हैं ? उत्तर--उषन्ते. दह्यन्ते पापकर्मारिण यस्मिन् तत् पर्युषणम् । जो पाप कर्मों को नष्ट करता है, जलाता है, उसे पर्दूषण कहते हैं । प्रश्न-अरहंत भगवान की दिव्यध्वनि कितनी बार खिरती है ? उचर-प्ररहन्त भगवान् की दिव्यध्वनि निकाल --प्रातः, मध्याह्न और रासा
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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