________________
८०८ ]
[ गो. प्र. चिन्तामणि
SAREET -
- Falanwar-
in-
सुमतिनाथ पद्मप्रभ सुपार्श्वनाथ
सिद्धवरकूट
iyonim
--- ..
११
पुष्पदन्त. शीतलनाथ श्रेयांसनाथ शान्तिनाथ कुन्थुनाथ अरहनाथ
सम्मेदशिखर
adi+
प्रसेनचन्द्र चन्द्रवर्ण अग्निमुख. सनत्कुमार वत्सराज . कनकप्रभ
मेघप्रभ १२ शान्तिनाथ
कुन्थुनाथ अरहनाथ विजयराज श्रीचन्द्र नलराज हनुमन्त
बलिराज २० वसुदेव २१ प्रधुम्न २२ नागकुमार
जीवन्धर २४ जम्बूस्वामी
सिद्धवरकूट
AA
मल्लिनाथ
१०
"
तुगगिरि
मुनिसुव्रत तमिनाथ নাবিলা
सिद्धवरकूट
ANDED
पार्श्वनाथ महावीर
ऊर्जयन्तगिरि कैलास पर्वत सिद्धवरकूट जन्बुवन
AN
विदेह क्षेत्र का स्वरूप :---
श्री अकलंक स्वामी ने राजवार्तिक अध्याय ३ पृ० १२२ में लिखा है :-'तत्र हि मुनियो देहोच्छेदार्थ यतमानाः विदेहत्वमास्वंदति' वहां मुनिगण देहत्यागार्थ उद्योग करते हुये देहरहितपना अर्थात् सिद्ध पद प्राप्त करते हैं।
ali