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९ बलदेव-इनको बलभद्र, रामचन्द्र, राम ऐसा भी कहते हैं
बलभद्रों के पूर्व के तीन भवान्तर-- जन्मभूमि--
अध्याय : नौवां ]
शिरीर की
पिछले तीसरेपिचले तीसरे |
वहां के उनके पिछले भव के. क्रमांक / बलदेवों के नाम भर के नगर भय का नाम
गरुनों के स्वादिकों के राजधानी
दक्षिा
जनक (पित्तजननी ।
के नाम ।
(धनुष)
सुधर्म [
मृगांक श्रुतिफीति
विजय पुडरीकिती बास अतार अनुसरविमान पौदनापुर प्रजापति भद्राभोजा सुवर्णकुम प्रचल पृथिवी मारुतदेय
वारकापुरी ब्रह्ममूत सुभद्रा सरयकीर्ति स] मानंदपुरी नन्दीमित्र सुभ्रत
हस्तिनागपुर रौद्रनन्द . सुवेषा सुधर्म मन्तपुरी महाबस वृषभ सहस्त्रार स्वर्ग
सौम सुदर्शना बीतशोका पुरुषर्षभ प्रजापाल
चक्रपुर प्रख्यात सुप्रभा
(खगपुर) ६ नन्दीषण विजयपुर सुदर्शन
" कुशाग्रपुर . विजया सुमित्र [प्रानंद] नन्दोमित्र मुसीमा सुवर सुधर्म ब्रह्मस्वर्ग मिथिलापुर मियाकर बैजयन्ती भवनश्रुत
क्षेमर श्री रामचन्द्र आरत , अयोध्या यशरथ अपराजित सुक्त ६ बलिराम हस्तिनागपुरः शंख - विद्रम महाशुक्र स्वर्ग मथुरा . वसुदेव रोहिणी सिद्धार्थ पभ
शौरीपर। १ यह बलदेव पद नरक से पाने वाले जीवों को नहीं प्राप्त होता है। २ सब ही बलदेव ऊगामी अर्थात स्वर्ग और मोक्ष जाने वाले होते हैं। ३ बलदेवों के पांच रस्त अर्थात प्रायुध होते हैं।
[१] [रत्नमाला) हार] [२] लागल अपराजित हल [३] मूसल [३] स्यनन्दन [दिब्ध गदा कोई रथ भी कहते हैं । [५1 रिक-ये पांच रन क्रीड़ा मात्र से शवों का मान मर्दन करने काले वलदेवों के होते हैं।
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