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[गो. प्र. चिन्तामणि . (७) दत्तक
जंघा तक (८) लक्ष्मण
, घोटे तक , (६) कृष्ण
, चार अंगुल ऊँचे तक उठाई थी। इस प्रकार हरिवंश पुराण के वेपनवें सर्ग में लिखा है।
नारद--
क्र. | नारदों के नाम
विशेष
भीम
१ नारायणों का जो तीर्थकाल है, वही इनका समझना । महाभीम २ यह नारद पद नरक में से पाने वाले जीवों को कभी
य नारट पट में - रौद्र (रुद्र) . . भी प्राप्त नहीं हो सकता है . . . महारौद्र ३ सब ही नारद अधोगामी अर्थात् अधोलोक जाने वाले काल
होते हैं । महाकाल . ४ सब ही कलहप्रिय होते हैं और धर्म विषय में भी रत दुर्मस्व .. होते हैं, सब ही भव्य होने से परंपरा से मुक्तिगामी होते नरमुख
हैं । वर्तमान में सभी हिंसा दोष से अधोलोक जाते हैं। अधोमुख ५ इनके शरीर की ऊँचाई, आयु आदि के विषय में सामग्री
उपलब्धि नहीं हो सकने से नहीं दे सके हैं।
। आमाको भूमिका ___ क्षमावान ही वीर है, क्षमावान हो घोर
क्षमा-खड्ग हो हाथ में हरे हृदय की पीर ॥ क्षमा ढाल.हो हाथ में, साहस की तलवारशत्रु मित्र हो जायगा, कौन करेगा चार ॥
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CENTRVATSAPNESS