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________________ ७६ ] [गो. प्र. चिन्तामणि . (७) दत्तक जंघा तक (८) लक्ष्मण , घोटे तक , (६) कृष्ण , चार अंगुल ऊँचे तक उठाई थी। इस प्रकार हरिवंश पुराण के वेपनवें सर्ग में लिखा है। नारद-- क्र. | नारदों के नाम विशेष भीम १ नारायणों का जो तीर्थकाल है, वही इनका समझना । महाभीम २ यह नारद पद नरक में से पाने वाले जीवों को कभी य नारट पट में - रौद्र (रुद्र) . . भी प्राप्त नहीं हो सकता है . . . महारौद्र ३ सब ही नारद अधोगामी अर्थात् अधोलोक जाने वाले काल होते हैं । महाकाल . ४ सब ही कलहप्रिय होते हैं और धर्म विषय में भी रत दुर्मस्व .. होते हैं, सब ही भव्य होने से परंपरा से मुक्तिगामी होते नरमुख हैं । वर्तमान में सभी हिंसा दोष से अधोलोक जाते हैं। अधोमुख ५ इनके शरीर की ऊँचाई, आयु आदि के विषय में सामग्री उपलब्धि नहीं हो सकने से नहीं दे सके हैं। । आमाको भूमिका ___ क्षमावान ही वीर है, क्षमावान हो घोर क्षमा-खड्ग हो हाथ में हरे हृदय की पीर ॥ क्षमा ढाल.हो हाथ में, साहस की तलवारशत्रु मित्र हो जायगा, कौन करेगा चार ॥ % CENTRVATSAPNESS
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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