SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 885
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ७६६ } [ गो. प्र.चिन्तामणि सुन्दर है । पद्मपुराण में कहा है कि भीम, महाभीम नाम के यक्षों ने 'मेघनाद' विद्याधर से कहा था कि हम लंकापुरी प्रापको देते हैं । आप वहां सुख से रहना । यही आगम कथित रावण को 'लंका' समझनी चाहिये । लंकामें लंका नाम से प्रसिद्ध अन्य स्थान भी हो सकते हैं। ५. इन पर सदाकाल १६ चमर हुरते रहते हैं । ६. रावण को 'राक्षस' समझना अज्ञान है । वे विद्याधर थे 'राक्षस' नामक द्वीप में रहते थे। इसी तरह रावण को 'दशकंठ' समझना भी अज्ञान है । । LOAD कौन-कौन से तीर्थकरों के तीर्शकाल में हुए है? आगे कौन सी गति प्राप्त की है ? . भविष्यकाल में होने| अतीत काल के वाले नारायणों | नारायणों के नाम के नाम: 20 था। काकुत्स्थ वरभद्र .. " ७ में नरक गये . नन्दी नन्दीमित्र नन्दीषण नन्दीभूति Hama बलदेवों का जो तीर्थकाल है, वही नारायणों का तीर्थकाल समझना चाहिये। m संश्लिष्ट वरवीर शत्रु जय दमितारि प्रियदत्त विमलवाहन akk. c महाबल अतिबल त्रिपृष्ट द्विपृष्ट ४ थी भूमि , ३ री भूनि , ELESA SINESS ARTIME L ES सूचना-६ नारायण सम्बन्धी--- .. १. यह नारायण पद नरक में से आने वाले जीवों को कभी भी प्राप्त नहीं हो सकता ... है, ऐसा नियम है।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy