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अध्याय : नौवां ]
[ ७६१ उसके पीछे-पीछे चलते हुए हरिण धारण करने वाले बहुत से कुलिंगी वा अन्य देखे ।
भेषधारी हो जायेंगे । ३. बड़े हाथो के उठाने योग्य बोझ पंचकाल में साधु लोग तपश्चरण के समस्त
से जिसकी पीठ टूट गई है, ऐसे गुणों को धारण करने के लिये समर्थ नहीं घोड़े को देखा।
होंगे । मूलगुण और उत्तरगुरणों के पालन करने की प्रतिज्ञा लेकर भी कोई उनके पालन करने में पालस करने लगेंगे, कोई मल से संब गुणों को ही नष्ट कर देगे और कोई मन्दता वा उदासीनता धारण
करेंगे। ४. वृक्ष, लता तथा छोटे पौधों के सुखे आगे के (पंचम काल) लोग सदाचार को __ पत्तों को खाते हुए बहुत से बकरों छोड़कर दूराचारी हो जायेंगे ।
के समूह को देखा। ५. हाथी के कन्धे पर बैठे हुए बन्दर प्राचीन क्षत्रियों के वंश का नाश हो को देखा।
जायगा और फिर नीच कुल वाले इस
पृथ्वी का शासन वा पालन करेंगे। • ३. अनेक कौवा और पक्षी जिन्हें लोग जैन मुनियों को छोड़कर धर्म की __श्रास दे रहे हैं, ऐसे उल्लू को इच्छा से अन्य मतियों के साधुओं के समीप देखा।
जायेंगे। ७. बहुत से भूतों को नाचते हुए प्रजा के लोग नामकर्म आदि कारणों से देखा।
व्यन्तरों को देवता मानकर पूजा सेवा
आदि करेंगे। ८. जिसके बीच की जगह सूखी पड़ी यह धर्म प्रार्य क्षेत्र में न रहकर म्लेच्छ देश
है और किनारों पर चारों ओर के लोगों में रहेंगा । खूब पानी भरा हुआ है ऐसा । तालाब देखा । ६. धूल से मैली हो रही है, ऐसी पंचमकाल में मुनिलोग शुक्लध्यान, ऋद्धि
रत्नों की राशि को देखा। ग्रादि से विभूषित उत्तम नहीं होंगे।