________________
७६० ]
[ गो. प्र. चिन्तामणि
।
३. चक्रवती के पुत्र-पुत्रियां संख्यात हजार होते हैं । ३ करोड ५० हजार बन्धु
वर्ग (भाई बन्ध) होते हैं । ३६१ शरीर वैद्य ३६१ इतर वैद्य होते हैं । ३६० अङ्ग रक्षक होते हैं । २६० स्वयंपाकी (रसोई वाले) होते हैं।
और १४ रत्न होते हैं। ४. चक्रवर्ती पर ३२ यक्षदेव ३२ चामर दुराते रहते है । ५. बारह योजन तक सुनाई देने वाले २४ शंख २४ भेरी (नगाड़ा) २४
पटह (वाद्य विशेष) होते हैं । ६. ३२ हजार नाट्य शालायें और ३२ हजार संगीतशालायें होती हैं । ३२ हजार देश और उन प्रत्येक देश के ३२ हजार मुकुटधारी राजाओं पर स्वामित्व होता है। इसी तरह १५ हजार मात्रद देवों का स्वामी
और ८८ हजार म्लेच्छ राजाओं का स्वामी होता है। ७. एक आर्य खंड और पांच म्लेच्छ खंड इस प्रकार छह खंड पृथ्वी के
स्वामी रहते हैं । एक करोड़ 'हल' होते हैं, ३ करोड़ गो मण्डल अर्थात् गौ रहने के स्थान होते हैं। इससे सिद्ध होता है कि मौ तीन
करोड़ से ज्यादा ही होती है। ८. भरत चक्रवर्ती के एक करोड़ सोने के थाल थे, ऐसा कोई कहते हैं; परन्तु
वे दाल चावलादि धान पकाने के बर्तन थे । क्योंकि श्लोक में 'स्थाली' शब्द है, उसका अर्थ गगरी (बर्तन) ऐसा होता है, इसलिए वे थाली न रहकर बड़े-बड़े बर्तन थे ऐसा सिद्ध होता है। (देखो आदि-पुराण पर्व ३७)।
भरत चक्रवर्ती के १६ स्वप्न
RESED
स्वप्न दर्शन
स्वप्न का फल
१. तेईस सिंहों को देखा जो कि इस श्री महावीर स्वामी को छोड़कर बाकी पृथ्वी पर अकेले ही बिहार कर तेईस तीर्थंकरों के समय में दुष्ट नयों की
पर्वत के शिखर पर चढ़ गये थे। तथा मिथ्याशास्त्रों की उत्पत्ति नहीं होगी। २. अकेला सिंह का बच्चा देखा और श्री महावीर स्वामी के तीर्थ में परिग्रह को
Media
MPANKS