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[ गो. प्र. चिन्तामणि १०. आदर सत्कार से जिसकी पूजा अवती ब्राह्मण गुरणी पात्रों के समान प्रादर
को जा रही है, ऐसा नैवेद्य खाता सत्कार पावेंगे ।
हुने कुत्ते को देखा। ११. शब्द करता हुने एक तरुण बैल लोग तरुण अवस्था में ही मुनिपद धारण - को बिहार करते हुये देखा। करेंगे वृद्धावस्था में धारण नहीं करेंगे। १२. सफेद परिमंडल (चारों ओर पंचमकाल में मुनियों के अवधिज्ञान और
गोल सफेद रेखा) से घिरा हुआ मनःपर्यय ज्ञान उत्पन्न नहीं होंगे।
है, ऐसा चन्द्रमा देखा। १३. जिन्होंने आपस में मित्रता की है पंचमकाल ने मुनि लोग साथ-साथ रहेंगे
(परस्पर मिलकर जा रहें हैं) एकाविहारी (अकेले विहार करने वाले) तथा उनकी शोभा नष्ट हो रही नहीं होंगे।
है, ऐसे दो बल देखे । . १४. सूर्य को बादलों से ढका हुआ पंचमकाल में प्रायः केवल ज्ञानरूप सूर्य का देखा।
उदय नहीं होगा। १५. छाया रहित सूखा वृथा देवा पुष और विनों के समाचार प्रायः भ्रष्ट
हो जायेंगे। १३. पुराने पतों के समूह को देखा। महा प्रौषधियों का रस अर्थात् गुण नष्ट,
हो जायेगा ।
-कातालानगरमility
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इस स्वप्नों को इस प्रकार फल देने वाले और दूर अर्थात् प्रामाभी पंचम काल में फल देने वाले जानना । इस प्रकार वर्णन महापुराण एवं ४१ में लिखा है । ६. नारायण--इनको वासुदेव, केशव, गोविन्द हरि ऐसा भी कहते हैं
नारायणों के पूर्व के तीन भवनारायरणों के नाम पिछले तीसरे भव के वहां की नगरियों वहां के गुरुत्रों के
वहां के नाम के नाम नाम
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१. विषिष्ट (त्रिपृष्ट) विश्वनन्दी
.
हस्तिनागपुर . .
संभूत