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________________ Siri [ गो. प्र. चिन्तामणि मी प्रश्न :---बारहवें गुणस्थान में कितनी प्रकृतियों का बन्ध होता है ? उत्तर :--एक साता वेदनीय मात्र का बंध होता हैं। प्रश्न :--बारहवें गुणस्थान में कितनी प्रकृतियों उदय है ? उत्तर :-ग्यारहवें गुणस्थान में जिन' ५६ प्रकृतियों का उदय होता है, उनमें से बच्च नारात्र और नाराच इन दो. व्युच्छिन्न प्रकृतियों के घटाने पर ५७ प्रकृतियों ___ का बारहवें गुणस्थान में उदय होता है । प्रश्न :- बारहवें गणस्थान में सत्त्व कितनी प्रकृतियों का होता है ? उत्तर :-- दशवें गुरगस्थान में क्षपक श्रेणी वाले की अपेक्षा १०२ प्रकृतियों का सत्त्व है, उनमें से व्युच्छिन्न प्रकृति संज्वलन लोभ को घटाने पर शेप १०१ प्रकृतियों का बारहवें गुरास्थान में सत्व रहता है । . प्रश्न :-तेरहवें गुणस्थान में बन्ध कितनी प्रकृतियों का होता है ? उत्तर :- एक मात्र साता वेदनीय का बन्ध होता है। प्रश्न :- तेहरवें गुरणस्थान में उदय कितनी प्रकृतियों का होता है ? उत्तर :--बारहवें गुरगस्थान में जिन सत्तावन प्रकृतिकों का उदयं होता है, उनमें से दच्छिन्न प्रकृत्तियां सोलह ज्ञानावरण की ५, अन्तराय की ५, दर्शनावरण का की ४, निद्रा और प्रचला को घटाने पर शेष ४१ प्रकृतियों में तीर्थंकर की अपेक्षा से एक तीर्थकर प्रकृति को मिलाकर ४२ प्रकृतियों का तेरहवें गुण स्थान में उदय होता है। प्रश्न :-तेहरवें गुणस्थान में सत्त्व कितनी प्रकृतियों का होता है ? उत्तर :-बारहवें गुणस्थान में जिन १०१ प्रकृतियों का सत्त्व है, उनमें से व्युछिन्न । प्रकृतियां सोलह (ज्ञानावरण की ५, अन्तराय की ५, दर्शनावरण की ४ निद्रा १, प्रचला) को घटाने पर शेष . ८५. प्रकृत्तियों का तेरहवें गुरणस्थान में सत्त्व रहता हैं। - प्रश्न :--चौदहवें गुणस्थान में बन्ध कितनी प्रकृतियों का होता है ? . ... उत्तर :- तेरहवें गुणस्थान में जिन एक साता वेदनीय का बन्ध होता था, उसकी उसी गुणास्थान में ब्युपिछत्ति होने से प्रयोग केवली गुणस्थान में किसी भी प्रकृति का बन्ध नहीं होता है । -'.1
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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