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________________ श्रध्याय: पहला ] प्रश्न उत्तर प्रश्न उत्तर - दशम गुणस्थान में कितनी प्रकृतियों का उदय होता है ? नवम गुणस्थान में जिन ६६ प्रकृतियों का उदय होता है, उनमें से व्यच्छिन प्रकृतियां छह स्त्रीवेद, पुरुपवेद, नपुंसकवेद, संज्वलन क्रोध, मान, माया की त्रुटाने पर शेष ६० प्रकृतियों का दशम गुणस्थान में उदय होता है । - दशम गुणस्थान में सत्व कितनी प्रकृतियों का रहता है ? -उपशम श्रेणी में तो नवम गुणस्थान की तरह द्वितीयोपसम्य सम्यग्दृष्ट के १४२ र क्षायिकसम्यन्दृष्टि के १३६ और पक श्रेणी बाले के नवम गुणस्थान में जिन १३८ प्रकृतियों का सत्व है, उनमें से प्रतियां छत्तिस तिर्यग्यति तिर्यग्गत्यानुपूर्वी विकलत्रय की रे, प्रचला, स्त्यानगृद्धि, उद्योत में एकेन्द्रिय, साधारण निद्रानिद्रा, सूक्ष्म, स्थावर, ग्रप्रत्याख्यानावरण की ४, प्रत्याख्यानावरणकी ४, काय, की संज्वलन क्रोध मान माया नरकगति नरक गत्यानुपूर्वी को वटा शेष १०२ प्रकृतियों का.. दशम गुणस्थान में सरव रहता है | प्रचला ३५ ? प्रश्न :- ग्यारहवें गुरणस्थान में बन्ध कितनी प्रकृतियों का होता है उत्तर:- दशम गुणस्थान में जिन ७ प्रकृतियों का यंत्र होता था, उनमें से व्युच्छिन्न प्रकृतियां १६ अर्थात् मानावरण की ५ दर्शनावरण की ४ अन्तराम की ५, यशस्कीर्ति उच्चोत्र ? के घटाने पर शेष एक मात्र सातावेदनीय का ग्यारहवे गुणस्थान में बंध होता है । प्रश्न :--- ग्यारहवें गुरणस्थान में उदय कितनी प्रकृतियों का होता हैं ? उत्तर - दसवें गुगास्थान में जिन ६० प्रकृतियों का उदय होता है, उनमें से व्युच्छिन्न प्रकृति एक संचलन लोभ को घटाने पर शेष प्रकृतियों का ग्यारहवे गुणस्थान में उदय होता है । प्रश्न :- यारहवें गुणस्थान में सत्त्व कितनी प्रकृतियों का होता है ? उतर -नवम गुणस्थान और दशम गुरणस्थान की तरह द्वितीय सम्यग्दृष्टी के. १४२ और क्षायिक सत्यदृष्टी के १३६ प्रकृतियों का ग्यारहवें गुणस्थान में सत्व रहता है ।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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