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[ गो. प्र. चिन्तामणि प्रश्न :- ग्राठवें गुणस्थान में कितनी प्रकृतियों का सत्व रहता है ? उत्तर :----सातवें गुणस्थान जो १४६ का सत्त्व कहा है, उनमें से युच्छिन्न प्रकृतियां
अनन्तानुवन्धी क्रोध, मान, माया. लोभ इन चारों को बटाने पर द्वितीयोपशम सम्यग्दृष्टि उपशम थे गगी वाले के दर्शनमोहनीय का तीन प्रकृति रहित १३६ का सत्त्व रहता है । और क्षपक श्रेणी वाले के सातवें गुणास्थान की ज्युझ्छिन्न प्रकृतियां पाठ को (अनन्तानुबन्नी क्रोध, मान, माया.. लोभ, तथा दर्शन मोहनीय की ३ और एक देयायु को) बटाकर शेष १३८ ।
प्रकृतियों का सत्त्व रहता है। प्रश्न :-नवम गुणस्थान में कितनी प्रकृतियों का बन्ध होता है ? . उत्तर :- पाठवें मुस्थान में जिन ५८ प्रकृतियों का बन्ध कहा है, उनमें से व्युच्छिन्न
प्रकृतियां छतिस . (निद्रा, प्रचला, तीर्थकर, निर्भागा, प्रशस्तविहायोगति, पंजाष्ट्रिय जाति, जसम, कार्माणशरीर, आहारकशरीर पाहारक. प्रांगोपांग, समचतुरस्त्र-संस्थान, चैकिय यांगोपांग, देवमति, देवगत्यानुपूर्वी.. रूप, रस, गंध, स्पर्श, अगुरूलघुत्य, उपधात, परघात, उच्छवास, ससा, बादर पर्याप्त, प्रत्येका, स्थिर, शुभ, सुभग, सुस्वर, आदेय, हास्य, रति, जुगुमा, भय).
को चटाने पर शेष. २२ प्रकुतियों का नवा गुगास्थान में बन्ध होता है। प्रश्न :--नवम गुणस्थान में उदय कितनी प्रकृतियों का होता है ? । उत्तर :--- अष्टम गणस्थान में जिन ७२ प्रकृतियों का उदय होता है, उनमें से व्युच्छिन्न ।
प्रकृतियां छह (हास्य, रति, अरति, मोक, अय, जुमुरमा) को घटाने पर
शप ६६ प्रकृतियों का उदय होता है। प्रश्न :-नवम गुरणस्थान में सत्य कितनी प्रकृतियों का होता है ? उत्तर :----अष्टम गुराणस्थान की तरह इस. गुणास्थान में भी उपशाम श्रेणी बाले. ___ द्वितियोपशमसम्यग्दाटी के १४२, क्षसिम्यग्दृष्टी के १३६ और क्षपकोणी
वाले के १३८ प्रकृतियों का ही सत्त्व रहता है। प्रश्न :- दशम गुणस्थान में कितनी प्रकृतियों का बंध होता है ? उत्तर :-नवम गुरास्थान में जिन २२ प्रकृतियों का बन्ध होता है, उनमें से ज्युच्छिन्न .. प्रकृतियां पांच (पुरुषवेद, संज्वलन. क्रोध, मान, माया, लोभ) को घटाने पर
शेष १७ प्रकृतियों का यहां बन्ध होता है ।