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________________ अध्याय : पहला ] [ ३३ प्रश्न :-छठवें गुणस्थान में कितनी प्रकृतियों का सत्व रहता है ? उत्तर :--पंचम गुणस्थान में १४७ प्रकृतियों की सत्ता कही है, उनमें से व्युच्छिन्न प्रकृति एक तिर्यञ्चगति को घटाने पर. १४६ प्रकृतियों का छठवें गुणस्थान में । सत्त्व रहता है। किन्तु क्षायिक सम्यग्दृष्टि में १३६ का ही सत्त्व कहा है । प्रश्न :--सातवें गुणस्थान में बन्ध कितनो प्रकृतियों का होता है ? उत्तर :-छठे गुणस्थान में जिन ६३ प्रकृतियों का बंध कहा है, उनमें से व्युच्छिन्न प्रकृति छह के (अस्थिर, अशुभ, असाता, अयशस्कीति, अरति, शोक को) घटाने पर शेष रही ५७ में साहारक शरीर और ग्राहार प्रांगोपांग इन दो प्रकृतियों को मिलाने से सप्तम गुणस्थान में ५६ प्रकृतियों का वध होता है। प्रश्न :- सप्तम गुणस्थान में उदय कितनी प्रकृतियों का होता है ? .. उत्तर :- छठे ग्रामस्थान में जो ८१ प्रक नियों का उदय कहा है, उनमें से ट्युछिन्न प्रकृति पांच (आहारकशरीर, आहारकांगोपांग, निद्रानिद्रा, प्रचलाप्रचला, और स्त्यानगृद्धि) के घटाने पर शेष रही ७६ प्रकृतियों का संप्सम गुण स्थान में उदय होता है । प्रश्न :-सप्तम गुणस्थान में कितनी प्रकृतियों का सत्व रहता है ? उत्तर :- गास्थान की तरह इस गुगास्थान में भी १४६ की सत्ता रहती हैं। .. किन्तु क्षायिक सम्यग्दृष्टि के १३६ प्रकृति का ही सत्व रहता है। प्रश्न :...-पाठवें गुणस्थान में बन्ध कितनी प्रकृतियों का होता है ? उत्तर :- सातवें गुणस्थान में जिन ५.६ प्रकृतियों का बन्ध कहा है, उनमें से म्यूछिन्न प्रकृति एक देवायु को घटाने पर ५८ का बंध होता है । प्रश्त :-प्रायने गुणस्थान में कितनी प्रकृतियों का उदय रहता है ? . उत्तर :- सातवें गुगास्थान में जिन ७६ प्रकृतियों का उदय कहा है, उनमें से व्युस्छिन्न प्रकृतियां बार (सम्यकप्रकृति, अर्द्धनाराचसंहनन, कीलक, प्रासंप्राप्तामृपाटिकासंहनन) के घटाने पर शेष ७२ प्रकृतियों का अष्टम् गुणस्थान में उदय होता है। PPORRRR A M . .
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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