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THANE
[ गो. प्र. चिन्तामणि उपरोक्त गुण युक्त राजाओं की १८ श्रेणियां होती हैं, उनका स्वरूप----
१. सेनापति - सेना का नायक, २. गणपति ज्योतिषी पादिकों का नायक, ३. वरिणपति – व्यापारियों का नायक, ४. दण्डपति = समस्त सेना का नायक, ५. मंत्री--पंचांगमंत्र विषय में प्रवीण, ६. महत्तर =कुलवान अर्थात् कुल विशेष उच्चता, ७. तलवर-कोतवाल का स्वामी, ८. ब्राह्मण, ६. क्षत्रिय, १०. वैश्य, ११. शुद्र=इन चार वरों का स्वामी, १२. हाथी, १३. घोड़ा, १४. रथ, १५. पदाति -- इस चतुरंग बलों का स्वामी, १६. पुरोहित - प्रात्महित कार्य का अधिकारी, १७. अमात्य-देश का अधिकारी, १८. महामात्य - समस्त राज्य कार्यों का अधिकारी
। इस प्रकार जो १८ श्रेणियों का स्वामी है, वही 'राजा' है । और वही 'मुकुटधारी' हो सकता है । इसी तरह--- ..
जो पांच सौ मुकुटधारी राजाओं का स्वामी है, वह 'अधिराजा' कहलाता है। जो एक हजार
वह 'महाराजा' , जो दो हजार ,
वह 'मुकुटबद्ध' या 'अर्धमाड
लिक' कहलाता है। जो चार हजार ,
वह 'मांडलिक' कहलाता है । जो पाठ हजार .,
वह 'महामांडलिक , जो सोलह हजार ,
वह अधंचकी - जो ३२ हजार
वह 'सकल चक्रवर्ती , __ अर्थात् षट्खंड पृथ्वी का (भरत खंड का) अधिपति होता है। इस प्रकार श्रेणी बद्ध चक्रवर्ती का राज्य निराबाध चलता रहता है।
षट्लंड मंडित भरतखंड के एक-एक देश में रहने वाले अलग-अलग नामादिकों की संख्या और नामादि लक्षणग्रामादिकों की संख्या
ग्रामादिकों के नामादि लक्षण--
१. ग्राम ६६ करोड़ रहते हैं।
जिस गांव के चारों ओर दीवाल (कोट) होता है, उस गांव को 'ग्राम' कहते हैं। जो गांव के चारों ओर दीवान और चार दरबाजों से संयुक्त है उस गांव को नगर कहते हैं ।
२. नगर ७५ हजार रहते हैं।