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________________ ७८० ] भरत चक्रवर्ती का जन्म चैत्र कृष्ण राशि का चन्द्र जब मीनलग्न में था तब हुआ था । to ब्राह्मण व अनादि से है ? नहीं, भरत चक्रवर्ती ने ब्राह्मण वर्ण की स्थापना की थी। आदि पुराण पर्व ३८ में लिखा है- तेषां कृतानि चिन्हानि सूत्रः पद्माह्वयासिषेः । उपाहारेकादशान्तकैः ( तेन ) ।। १६१०।। अर्थात् भरत चक्रवर्ती ने 'पद्म' नाम की निधि से एक से लेकर ग्यारह तक ब्रह्मसूत्र देकर ब्राह्मण वर्ग की स्थापना की थी। इस तरह भरतेश्वर द्वारा चतुर्थ काल के प्रारम्भ में ब्राह्मण वर्ग को उत्पत्ति हुई है । पांचों विदेह क्षेत्र में ब्राह्मण वर्ण है या नहीं ? वहां कितने वर्ण हैं ? अर्थात् — विदेह क्षेत्र में ब्राह्मण नहीं है। वहां क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र ये तीन ही वर्ण होते हैं । क्रमांक, ग्रागे कौनसी गति प्राप्त की ? १ १. २. ३. ४. ५. प्रजा वर्णत्रयोपेता जिनधर्मरता शुभा । व्रतशील तपोवृष्टि भूषिता न द्विजाः क्वचित् ॥ १६११ ॥ सिध्दान्तसार प्रदीप ७. सिध्द (मुक्त) भये [ गो. प्र. चिन्तामणि उत्तराषाढ़ नक्षत्र, ब्रह्मयोग, धनु र 13 सौधर्म स्वर्ग गये सनत्कुमार स्वर्ग गये सिध्द भये Fr 77 भविष्यकाल में होने वाले अतीत काल के १२ सकल १२ चक्रवर्तियों के नाम चक्रवर्तियों के नाम ३ भरत दीर्घदन्त मुक्तदन्त गूढदन्त श्रीषे श्रीभूति श्रीकान्त ४ श्रीपेरण पुण्डरीक वज्रनाभ वज्रदत्त वज्रघोष चारूदत्त श्रीदत्त P
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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