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[ गो. प्र. चिन्तामणि
१६. निर्मल
१७. चित्र गुप्त १८. समाधि गुप्त १६. स्वयंभू
कृष्ण
तीसरे नरक से (वासुदेव.) सिरि (बलराम) भगलि विगलि (बागलि) द्वीपायन
२०. अनिवृत्तिक
(अनिवर्तक) २१. जय
मारावक (कनकदाद)
२२. विमल २३. देवपाल
सरूपदत्त (चारूपाद) सात्यकी पुत्र (रुद्र, महादेव)
SARAN
२४. अनन्तवीर्य
तीसरे नरक से ५००
धनुष
एक करोड़ पूर्व
इस प्रकार तिलोयपरणत्ति के चतुर्थ अधिकार (गाथा नंबर १५७८ से १५८६) में उल्लेख है । इसी तरह श्री गुणभद्राचार्य विरचितः उत्तर पुराण के श्लोक नम्बर ४०१ से ४७४ पर्व ७६ में लिखा है। १. श्री महावीर भगवान् जिस दिन मुक्त हुए उसी दिन गौतम स्वामी को
केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था । इसी तरह जिस दिन गोतम गराघर मोक्ष गए, उसी दिन सुधर्म स्वामी केवली हुये हैं और जिस दिन सुधर्म स्वामी को मोक्ष हुमा उसी दिन जम्बू स्वामी केवली भये । इसलिये इन तीनों को 'अनुबन्ध केवली' कहते हैं । जम्बू स्वामी अन्तिम अनुबन्ध केवली हैं। सामान्य केवली की अयेक्षा से श्रीधर नामक अन्तिम केवली कुन्टलगिरि से