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तीर्थंकरों के साथ-साथ कितने जीव कौन-कौन सी गति को प्राप्त हुये हैं ?
कौन-कौन तीर्थंकरों के
| इस हैंडावसपिरणी काल कौन कौन से सौधर्म स्वर्ग से अनुत्तर विमानों में कितने कितने शिष्य तीर्थकरों के प्रत्येक तीर्थकाल में दोष सेदुषम सुषमा नामा क्रमांक | प्रासन से लेकर ऊर्व प्र. में कितने । (यतिगरा) कौन-कौन साथ-साथ जो अनुबन्ध केवली चौधे काल में जो जिन मोक्ष गये] तक कितने | गये उनकी । से समय में मोक्ष गये सिद्ध गये कितने-कितने हुए। धर्म का उच्छेद हुया था गये संस्था इसका खुलासा- .. उनकी संख्या
वह कहां तक रहा था?
1 उसका काल प्रमाणतीर्थकरों का संख्या
संख्या मोक्ष का समय
दूसरे मत
द
८७
I
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६
०
पपासन कायोसासन २६००
२००००
२००००
७०१०० १००० १७०१०० १०००. २८.१०० १०००
०
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२०१६००
.
MMVvvv
१२०० १२००० १२००० १२००० १२००० ११०००
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श्री ऋषमनाथ भगवान से लेकर श्री शांतिनाथ तीर्थकर तक के सब तीर्थकरों के शिष्य (वतिगण) तीर्थकरों को केवल ज्ञान होने के पहले ही कौन कौन तीर्थंकरों के कितने-कितने शिष्यमण मोक्ष गये हैं, उनकी संख्या को प्राये कोष्टक ८६ में देखिये।
३१४००० २५५६००
३२४ ५००
सगंतररा।। . श्री पुष्पदन्त (सुविपिनाथ) तीर्थकर के समय से लेकर श्री धर्मनाथ तीर्थ कर के समय तक सात तीर्थ प्रवर्तनकाल में उम्छेद काल एक पल्य तक बढ़ता हुआ और पटता हुया नर्म तीर्थ विच्छेद रहा था। पल्लत रियादिचय पल्तचउत्युरणपादपरकालं ।।
सुविधीदुसतिभन्ते सो हो त्रिलोकसार में लिखा हैसविधिनाथ के तीर्थकाल में १/४ पाब पल्व का धर्म
शीतलनाथ के तीर्थकाल में १/२ प्राधा पल्य का खहिसद्धम्मो का विच्छेष हुमा था। विच्छेद हुमा था।
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२१४०००
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[गो. प्र. चिन्तामणि
०
१७६६०० १००० २०६०० ६५६०० १००० ५४६०० ६०१
०
७४००
१२
पचासन
११०००