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________________ । ७७ । ७८ | ७ | 62 T ४ । ७५ । १३ वैरोटी (विया) १ मास पहले te | प्राया.६ अपरान्ह अध्याय : नौवां ] २४ घनन्तमति (विज मसी) मंत्र कु. १५ उत्तबार सम्भदशिखरजो सुबीरकूट (सुवीरकुल स्ट) रेयसी .. स्वयंप्रमफूट (स्वयंभू) , १५. मानसी (परिभृते) ज्येष्ठ शु. ४ पुष्य १६ महामानसी (कन्दप) । ज्येष्ठ कु. १४ अपरान्ह भरणी सुदतवरकूट (दत्तवर) कुन्दम (प्रभास-या विभ) जानवरकूट १७ जय (धारिणी) दैशाख शु. २ कृत्तिका १५ विजया (काली) मैत्र कृ. १५ प्रभात रेवती नाटककूट निरोध करने के बाद चौदह दिनों तक भरक्ष नवती निरन्तर श्री मादिनाम भगवान की पूजा करते रहे । इस प्रकार आदि पुराण (महा पुराण) पर्व १७४ में लिखा है। १६ अपराजिता (अनजान) ,, फाल्गुन शु.५ अपरान्ह भरती सम्बलकूट २० बरपिसो (पुगंधिनी) । काल्गुन कु. १२ . श्रवणा निरकूट वैशाख कृ. १४ प्रभात अश्विनी त्रिधरकूट २१ शनी कुसुममा नहीं) मापार स.७. प्रदोष दित्रा गिरनार (অলি) २२ कुष्मांडी २३ पावती बावरण शु. ७ विशाखा सम्मेदशिखरजो मुकर्णभद्रकूट २४ सिद्धायनी दो दिन पहले कातिक कु. १५ प्रमात स्वाति पावापुरी पनसरोवर
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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