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४ । ७५ । १३ वैरोटी (विया) १ मास पहले
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प्राया.६
अपरान्ह
अध्याय : नौवां ]
२४ घनन्तमति
(विज मसी)
मंत्र कु. १५
उत्तबार सम्भदशिखरजो सुबीरकूट
(सुवीरकुल स्ट) रेयसी ..
स्वयंप्रमफूट (स्वयंभू)
,
१५. मानसी (परिभृते)
ज्येष्ठ शु. ४
पुष्य
१६ महामानसी (कन्दप)
।
ज्येष्ठ कु. १४ अपरान्ह
भरणी
सुदतवरकूट (दत्तवर) कुन्दम (प्रभास-या विभ) जानवरकूट
१७ जय (धारिणी)
दैशाख शु. २
कृत्तिका
१५ विजया (काली)
मैत्र कृ. १५
प्रभात
रेवती
नाटककूट
निरोध करने के बाद चौदह दिनों तक भरक्ष नवती निरन्तर श्री मादिनाम भगवान की पूजा करते रहे । इस प्रकार आदि पुराण (महा पुराण) पर्व १७४ में लिखा है।
१६ अपराजिता (अनजान) ,,
फाल्गुन शु.५
अपरान्ह
भरती
सम्बलकूट
२० बरपिसो (पुगंधिनी) ।
काल्गुन कु. १२
.
श्रवणा
निरकूट
वैशाख कृ. १४ प्रभात
अश्विनी
त्रिधरकूट
२१ शनी
कुसुममा नहीं)
मापार स.७.
प्रदोष दित्रा
गिरनार (অলি)
२२ कुष्मांडी
२३ पावती
बावरण शु. ७
विशाखा
सम्मेदशिखरजो मुकर्णभद्रकूट
२४ सिद्धायनी
दो दिन पहले
कातिक कु. १५ प्रमात स्वाति
पावापुरी
पनसरोवर