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________________ अध्याय : नौवां १३ कायोत्सर्यासन ५७०० ११००० ५२३०० ६००. १०००० ० १०००० ४२७०० ३६०० १०००। केवल मान के बाद ४८४०० एक महीना तक १०००० मोक्ष कितने मोक्ष ४६००० ३२०० १००० गये। २८०० १०००० १००० , दो , तीन , १७२०० । २८८.० श्रेयांसनाथ के तीर्थकाल में ३/४ पौन पय तक धर्म का विच्छेद बासू पूज्य के १ पल्म का विमलनाथ के, ३/४ पौन पल्य का अनन्तनाथ के १/२, प्राधा पाय धर्मनाथ के, १/४ वाव प्रत्य इस प्रकार विच्छेय काल क्रम से पार पल्य से लेकर एक पल्य तक बढ़ता गया। और फिर पटता हुआ पाव पल्य तक रहा जिस समय धर्म का दिच्छेद होता है उस समय मुनि, प्राधिका, धावक, प्राविका कोई मी नहीं रहते हैं। दीक्षा के सम्मुख होने वालों का अभाव होता रहता है। इसलिये धनरूपी सूर्य असंगत रहता है। १३७० २४०० ८८०० ५०० २००० १९२०० १००० ६२७ ८८०० । छः , १८०० एक वर्ष तक १८०० , दो , १००० , सीन पद्मासन ८००७ २३ कायोत्तमांसन १००० ५००० , छ: ॥ १०५८०० २७७८०० २४६४४०० ११५२
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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