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क्रमांक
३
४
१ एक वर्ष के बाद
२ चौदे दिन
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हूँ
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प
है
१०
११
१२
किसने दिनों में कौन सा आदार लिये थे लिया या
तीन दिन के
बाब
13
21
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21
४४
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31
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12
2)
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तीर्थंकरों के केवलज्ञान- ज्ञानकल्याणक
दान तीर्थ के प्रवर्तक दाताओं के द्वारा दीक्षा के बाद दिये गये आहारावि का विवरण
"
""
४५
इक्षुरस
देव के सिवाय बाकी सभी ने गो क्षीर
(गाय के दूध से बना हुआ क्षीरात्र | खीर] प्रयत् दूध के नाना
श्री
प्रकार के पकवान की
।
पारणा की थी
महार देने वाले दाल महाशयों के
.४६
पद्मदत्त
श्रवास राजा ( हरि-शाम )
wer [a] प्रयोच्या
सुरेन्द्रदत्त
इन्द्रवस
सोमदत्त
महेन्द्रदत्त
म
[ सोमदसराजा ] पुनर्वस [पुष्पराजा ]
जय
पारा किये हुये नगरों के नाम
नन्दन
[]
सौन्दर [सुनन्दनराज ]
[सुरेन्द्रनाथ राजा]]
४:७
हस्तिनापुर
श्रावfta
[ श्रावन्ति ]
अयोध्या
[ निशापुर ]
सोमन
[विजयपुरी]]
वर्धमान
[मंगलपुरी ] सोमखंड
[ पटलीडपुरी ]
नापुर
[ खंडपुर ] फीतपुर [ चिन्तहरपुर ] अरिष्टपुर सेयपुर) सिद्धार्थपुर [ श्ररिष्टपुर |
महापुर
[[सिद्धार्थपुर ].
४
१ पूर्वाङ्गकम
१ खास भू
도
१२
५१ ५२ एक लाख पूर्व यष्टमभक्त [३] फाल्गुन कृ. ११ पूर्वान्ह उत्तराषाढ
बेला [२] पौष्य शु. ११ म्रपराह्न रोहिणी
कार्तिक कृ. ४
मृगशिर
पुनर्वसु
१६
२०
२४
काल का प्रभास
२५
४८
५४
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22
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21
32
20
२५ हजार पूर्व
२१ साख वर्ष
केवल जान के पहले उपवास धाररंग का नियम
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נ:
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37
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3
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"
तिथि
५०
पौय सु. १४
चैत्र शु. ११
चैत्र शु. ३०
फाल्गुन कृ.
६
समय
कार्तिक शु. २
पौष्य कृ. १४
..
17
11
नक्षत्र
"
मधा
Feren
विशाखा
अनुराधा
भूला
पूर्वाषाढ़
माघ कृ. १५ पूर्वान्ह श्रवण
माघ शु. २
अपरान्ह विशाखा
७५२ ]
[ गो. प्र. चिन्तामरिण