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३५ |
३६ |
३ |
१८ |
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बम्घृक्ष
७२० मेघपटल का नाश ६०० उस्कापात देखना
बेला एक हजार तेला (बेला)
अध्याय : नौवां ]
पीपल
दीर्थपर्य नन्दीतरू
४६० पूर्वाभव का स्मरण
तिलक
१३ अपराई जसरामानपद देयदला कंपिला सहेतुक १४ , रेवशी सागरदत्ता अयोध्या -
नागदता रहनपुर शालवन १६ , भरणी सिद्धार्था हस्तिनागपुर --
कृतिका विजया , सहेतुक रेवती बैजयन्ति
। -१६ पूर्वाश्व अश्विनी जयन्ति मिथिलापुर श्वेतवन ২০ সন্তু গন্ধ হয় अपराजिता राजगही नीलवन
नील गुफा २१ अश्विनी उत्तरकुरु मिथितापुर चित्रवन-
४२०
आभ प्रशोक
३६० मेघपटल का नाश बेला ३०० बिजली का देखना बेला ३००(६०६) २४० पूर्वभव का स्मरण तेला (बेला) गक हजार
बकूल
१००
-
बेला
२२ पूर्वान्ह
सहसान चित्रा , देवकुर गिरनार .... विशाखा विमला वासखसी अश्ववन
मनोरमा उत्सरा चन्द्रप्रभा कुडलपुर जानवर
মগ্রন্থ वक्षलवृक्ष
१.२० प्राणी वध की वार्ता तेला(बेला) १०८ जातिस्मरण होना पष्टम भक्त
, ३००
२४ अपराह्न
भालवृक्ष
३२ धनुष
सेला ३० बेला
प्रकले (३००)
ke ]
थी शास्तिनाथ, कुबुनाथ, अरहनाथ ये सीन तीर्थकर चक्रवर्ती भी मए और कामदेव भी मए राज्य छोड़ फार वैराग्य दीक्षा) लिया और वासुपूज्य, नेमिनाथ, पाश्र्वनाथ और महावीर ये पांच तीर्थकर मार अवस्था में वैराग्य । (श्रमण) भए राज भी नहीं किया और विवाह भी नहीं किया और अन्य सोलह तीर्थंकरों ने महा मांडलिक, राका भये राम छाड़कर राम्य (दोक्षा) ली।