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अध्याय नौवां ]
,, दक्षिण ,
संचयपुर पयोत्तर
१२ , बासुपूज्य १३ ,, विमानलाध १४ ,, अनन्तनाथ
महानगर
पथरथ
, वत्सकावलि बात की लंड पूर्वमरत - ,, पश्चिम रम्बकावति
ऐरावत क्स
अरिष्टनर
असेच
१५ ,, धर्मनाथ
जम्बूद्वीप
पूर्व विदेह पुष्कलावति
। दक्षिस, महिलापुर दशरथ
(सुभद्रिका) " दृष्टिगह , पुरी किनी भेवरथ
१६., शास्तिनाथ
वरस
, उत्तर, सुसीमा
सिंहरथ
१५ , कुधुनाथ
सनपति
२-तीर्थकर ऋषभदेव को प्रादियाय, आदि ब्रह्म, पुष्पदन्त को सुविपिनाथ और महापौर को पर्थमान स्वामी, सन्मति, बीर, अतिवीर, महति महावीर भी कहते हैं और इन्द्र ने तीर्थ ट्टरों की १००८ नाम से स्तुति की है।
१८
परहनाय
दक्षिय, क्षेमपुरी
(क्षेमा) , दक्षिरा, बीतशोका
वत्स
वैश्रवण
२०, मुनिसुखरानाथ
भरत क्षेत्र
सम्पापुर श्री धर्मा
(हरिवर्म) • कौशाम्बी सिद्धार्थ
२१ , नमिनाथ
हस्तनागपुर सुप्रतिष्ठित
२२ । नेमिनाथ .
कौशल्य
२३ , पार्श्वनाथ
अयोध्या प्रानन्द (साकेता) छत्रपुर नन्द (छत्राकार) (नन्दव)