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________________ : क्रमांक १ श्री २ अजितनाथ ४ ६ ७ न ६ १० तीर्थंकरों के नाम ५ तिगा ११ 2: 37 21 TE 41 संभवनाथ 2. पद्मप्रभु 21 17 अभिनन्दनाय बर्तमान कालीन २४ तीर्थकुर सम्बन्धी कई ज्ञातव्य अर्थात् जानने योग्य बातें। सुपार्श्वनाथ चंद्रप्रभ तीर्थकरों के पूर्व तीन भवान्तर पिछले तीन भव का द्वीपों के चाम 13 #1 ३ प्रभू बीरा तुझे हे घातकी खंड 17 27 31 पुष्पदन्त करावं दीर गीतलनाथ भासकी ड श्रेयांसनाथ 11 क्षेत्रों के नाम ४ 73 ܐ 3: 17 rr dr " " " ir 1 देश या प्रान्त ५ वरस छन्द्र मंगलrafa पुष्कलावत वत्स सुन. च्छ पुति बरस सुकच्छ नगरी की सीमा " 75 पूर्वविदे नि सीता नदी के उत्तर सुसीमा विमान तटपर उसर 12 दक्षिण 37 १. उत्तर "7 दक्षिण " " दक्षिण उत्तर दक्षि 3. उसर " 37 "1 r CJ 21 73 नमरी का नाम ra ७ वहां के नाम प ओमपुरी विपुल वाहन (क्षमा) रत्नसंचयपुर महाबल यस सुसीमा अपराजित सन्दि शेपूचे (स) रायपुर पचनाभि पुरीकिनी महापद्म मोमा पद्मगुरुम क्षेत्रपुरी नलिनम वहां का राज वैभव rea ६ रामदेव का ओ तो चक्रवर्ती ११ अंग १४ पूर्व का कि राजा ११ के पाठी थे। रङ्ग सबका सुव सरीखा था। यह सब सिंहनिष्क्रीति यत के प्राचरण करने वाले एक are states संन्यास के धारक और स्वयं गामी थे । देता था। बाकी सब ७४२ ] [ गो. प्र. चिन्तामरिए
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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