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अध्याय : पाठवां ]
[ ७३७ जिनेन्द्र भगवान की मूर्ति के निमित्त से प्रात्मा का रागभाव सन्द होता है। परिणाम निर्मल होते हैं तथा सम्बग्दर्शन की प्राप्ति होती है।
प्रश्न :--सिअप्रतिमा फैसी होती है ?
उत्तर :-सिद्ध परमात्मा का ध्यान करने के लिए भी जिनेन्द्रदेव की प्रतिमा उपयोगी है। सिद्धप्रतिमा के स्वरूप पर प्राचार्य वसुनंदि सिद्धान्त चक्रवर्ती ने मूलाचार की टीका में इस प्रकार प्रकाश डाला है----'अष्टमहाप्रातिहार्य समन्विता अहत्प्रतिमा, तद्रहिता सिद्धप्रतिमा' । जो प्रतिमा अष्ट प्रातिहार्य समन्दित हो, वह अरहन्त भगवान की प्रतिमा है । अष्टप्रातिहार्य रहित प्रतिमा को सिद्ध प्रतिमा जानना चाहिये । इस विषय में यह कथन भी ध्यान देने योग्य है--'अथवा कृत्रिमा यास्ता अहत्प्रतिमाः, अकृत्रिमाः सिद्ध प्रतिमाः' (पृ० ३२ गाथा २५) अथवा सम्पूर्ण कृत्रिम जिनेन्द्र प्रतिमाएं अरहन्त प्रतिमा हैं । अकृत्रिम प्रतिमाओं को सिद्ध प्रतिमा कहा है।
इस प्राममधालो के होते हुए जो घातु विशेष में पुरुषाकार शून्य स्थान बनाकर उसके पीछे दपए को रखकर उसे सिद्ध प्रतिमा मानने की प्रवृत्ति विचारने योग्य है। इस प्रकार की मूर्ति का जब अागम में विधान नहीं है, तब पागम की प्राज्ञा को शिरोधार्य करने वाला सम्यादृष्टि अपना कलव्य और कल्याण स्वयं विचार कर सकता है । दक्षिण भारत के प्राचीन और महत्वपूर्ण जिन मन्दिरों में इस प्रकार की सिद्ध प्रतिमाएँ नहीं पाई जाती हैं, जैसी उत्तर प्रान्त में कहीं-कहीं देखी जाती है । आयम को प्रमाण मानने वाले सत्पुरुषों को परमागम में प्रतिपादित प्रवृत्तियों को ही प्रोत्साहन प्रदान करने का पूर्ण प्रयत्न करना चाहिये। - प्रश्न :--निर्वाणमुद्रा, अचेलभुद्रा या दिगम्बरमुद्रा का क्या स्वरूप है ?
उसर :--सिद्ध पद को प्राप्त करने के लिए सम्पूर्ण परिग्रह का त्याग कर वस्त्र रहित (अचेल) मुद्रा का धारण करना अत्यन्त आवश्यक है । यह दिगम्बर मुद्रा निर्वाण का कारण है, इसलिये इसे निर्धारणमुद्रा भी कहते हैं। दक्षिण भारत में दिगम्बर दीक्षा लेने वाले मुनिराज को 'निर्वाण स्वामी' कहने का सर्वत्र प्रचार है। ग्रजैन भी निर्वाशा स्वामी को जानते हैं। - सिद्धों का ध्यान परम कल्याणकारी है, इतना मात्र जानकर भोग तथा विषयों में निमग्न व्यक्ति कुछ क्षण बैठकर ध्यान करने का अभिनय करता है, तो इससे मनोरथ सिद्ध नहीं होगा । ध्यान के योग्य सामग्री का मूलाराधना टीका में इस प्रकार उल्लेख किया गया है
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