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________________ ७२६ ] [ गो. प्र. चिन्तामणि यह गाथा भी उद्धृत की है :------ ... सिद्धाय सिद्ध भूमी सिद्धारण-समाहियो रगहो-देसो। एयानो अण्णासो मिसीहीयानो सया बंदे ॥१५८०।। --- सिद्ध, सिद्धभूमि, सिद्धों के द्वारा आश्रित आकाश के प्रदेश आदि निषोधिकानों की मैं संदा वंदना करता हूँ। इस मागम के प्रकाश में कैलाश गिरि अादि निर्वाण भूमियों का महत्व स्पष्ट होता है। .... इससे 'निषीधिका या निषेधिका' पूज्य है, यह निर्विवाद है । निधिका शब्द को प्रतिनिधि शब्द कानड़ी भाषा में विशिदी' और मराठी में समाधि' कहने का प्रधान (प्रचार) है । दक्षिण भारत के महाराष्ट्र प्रांत में कोल्हापुर, कुभोज-बाहुबली पहाडी, नांदणी, शेउबाल, रायबाग, तेरदाल, भिलवड़ी, अर्कवाट इत्यादि अनेक गाँवों में निशिदीका हैं और दक्षिण कर्नाटक प्रान्त में श्रवण बेलगोला के चन्द्रागिरि पहाड़ पर भद्रबाहु स्वामी की निषाधिका है ! इस विषय का वर्णन रत्ननन्दीमुनि विरचित 'भद्रबाहु पुराण में लिखा है। __ निषेधिका पूजा के सम्बन्ध में कुन्दकुन्दाचार्य: विरवित षट् प्राभृत ग्रन्थ की टीका में श्रुतसागर सुरी लिखते हैं कि :..... देवहं सत्यहं मुणिवरहं जो विद्देसु करेइ । नियमि पाड हवेइ त में संसारू भभेइ ॥१५५१॥ देवेभ्यः शास्त्रेभ्यो मुनिवरेभ्यो यो विद्वषं करोति । नियमेन पापं भवति तस्य येन संसारे भ्राम्यति ।। योगीन्द्र देव ॥ . टीका :-अस्यदोहकस्य भावः-देवशास्त्रगुरुगा प्रतिमासु निपीधिकादिषु च पुष्पादिभिः पूजादिषु लोका द्वषं कुर्वन्ति तेषां पापं भवति, तेन पापेन ते नरकादी पतंति इति ज्ञातव्यम् । श्री श्रुतसागर सूरि । भावार्थ :---देवशास्त्र गुरुओं की प्रतिमा और निषीधिका आदि स्थानों का पुष्पादिक से पूजन करने के लिए लोग द्वेष करते हैं, वे दुर्गति में जाते हैं। . इस विषय में नेमिचन्द्र कृत प्रतिष्ठा तिलक शास्त्र में निपीधिका की यथोक्त .... HIRCale
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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