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________________ ७०८ ] । गो. प्र. चिन्तामणि भी कर्म का उदय नहीं है, जो सिद्ध पदवी के प्राप्त करने में विघ्न रूप न हो। पंचाध्यायी में लिखा है · नहि कर्मोदयः कश्चित्, जन्तो यः स्यात् सुखावहः । सर्वस्य कर्मशास्त्र, लक्षण्यात् स्वरूपतः ॥१५५१॥ ऐसा कोई कर्भ का उदय नहीं है जो प्रात्मा को आनन्द प्रदान करे, क्योंकि सभी कर्मों का उदय आत्म स्वरूप से विपरीत स्वभाव वाला है । इस कथन के प्रकाश में बह बात सिद्ध होती है कि स्वभाव परिणति की उपलब्धि में बाधक तथा विभाव परिरपति के साधक कारण सभी कर्म त्यागने योग्य हैं। सुवर्ण वर्ण के सर्प द्वारा कृत दंश प्राप्त व्यक्ति उसी प्रकार मृत्यु के मुख में प्रोस करता है, जिस प्रकार श्याम सर्पराज के द्वारा काटा गया व्यक्ति भी प्राणों का त्याग करता है । इसलिये शुद्धोपयोगी ऋषिराज ऋषभदेव तीर्थङ्कर ने दिव्य उपदेश देना बन्द कर दिया है ! उन्हें जितना कहना था, वह सब कह चुके । अन्य जीवों के उपकार के लिये यदि भगवान लगे रहें तो बे सिद्ध वधू के स्वामी नहीं बन सकेंगे । इसलिये अब भगवान पूरी निर्मलता सम्यादन के श्रेष्ठ उद्योग में संलग्न हैं । अन्य तीर्थकारों के योग निरोध का समय एक माह तक प्रागम में कहा गया है, इतना विशेष है कि वर्धमान भगवान ने जीवन के दो दिन शेष रहने पर योग्य निरोध प्रारम्भ किया था। यही बात निर्वाण भक्ति में इस प्रकार कही है--- प्रायश्चतुर्दश दिने विनिवृत्तयोगः, षष्ठेन निष्ठित कृति जनवर्धमानः । शेषा विधूत घनकम निबद्धपाशा, मासेन ते यतिवरास्त्वभवन्धियोगाः ॥१५५२॥ ऋषभाय भगवान ने मन-वचन-काय के योगनिरोध का कार्य चौदह दिन पूर्व किया था तथा वर्धमान जिनमे दो दिन पूर्व योगनिरोध किया था, घनकर्म राशि के बंधन को दूर करने वाले बाईस तीर्थंकरों ने एक माह पूर्व मन-वचन-काय की बाह्य क्रिया का निरोध प्रारम्भ किया था । ... प्रश्न :..-केवली के कौनसा ध्यान रहता है ? - उत्तर :---शुक्ल ध्यान का तृतीय भेद उस समय होता है, जब ग्रायु कर्म के क्षय के लिये अंतर्मुहूर्त काल शेष रहता है । अतएव प्रश्न होता है कि पाठ वर्ष से कुछ - -- -
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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