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________________ -- - - -.-.:-- . प्रश्न :--सी . ---.-. --... - - - --- ------ ६६६ ] । गो. प्र. चिन्तामणि जो व्यक्ति सावधान होकर भक्ति भाव से अरहन्त भगवान को नमस्कार जनता है, वह मानव शीघ्र ही समस्त दुःखों से छूट जाता है । प्रश्न :- तीर्थकर के केवलो अवस्था में नौ केवल लब्धियां अर्थात् भोगोप. भोग आदि के सद्भाव होने का क्या रहस्य है ? उत्तर :- केवली भगवान की परम केवल लब्धियां प्राप्त होती हैं :--- (१) दर्शनावरण कर्म के क्षय होने से अनन्तदर्शन-क्षायिक दर्शन की प्राप्ति होती है। (२) ज्ञानावरण , अनन्तज्ञान-क्षायिक ज्ञान की (३) वीर्यान्तराय , अनन्तवीर्य-क्षाधिक वीर्य की (४) चारित्र मोहनीय , अनन्तसुख-क्षायिक चारित्र की (५) दर्शन मोहनीय , अनन्तदर्शन-क्षायिक सम्यक्त्व की (६) दानान्तराय , क्षायिक दान की (७) लाभान्तराय , क्षायिक लाभ की (८) भोगान्तराय , क्षायिक भोग की (६) उपभोगान्त राय , क्षायिक उपभोग इस प्रकार चार धातिया कर्मों के क्षय से नौ परम केवल लब्धियाँ प्राप्त होती हैं । इन्हीं को जीव के असाधारण क्षायिक भाव भी कहते हैं। प्रश्न :-~-जिस समय तीर्थकर भगवान ने निग्रन्थ दीक्षा धारण की थी, उस दीक्षा के समय वे भगवान सर्व प्रकार के परिग्रह का त्याग कर चुके थे, तब उनके केवल ज्ञान अवस्था में भोगः उपभोग के सद्भाव होने का क्या रहस्य है ? इसी प्रकार पदार्थों के अभाव में उनमें दान के कथन का क्या भाव है ? उत्तर :-जो पदार्थ एक बार सेवन में आता है, उसे भोग कहते हैं, जैसे पुष्पमाला। जो अनेक बार भोगने में आता है, उसे उपभोग कहते हैं, जैसे वस्त्र । भगवान परम वीतरागी होने से सम्पूर्ण परिग्रह के पाप से उन्मुक्त हैं, फिर भी तीर्थंकर प्रकृति के विपाक काल में वैभव तथा विभूति की इतनी वृद्धि होती है कि संसार में उन तीर्थकर के समान कोई वैभव शाली नहीं है, फिर भी प्रांतरिक त्याग के अनुकूल वे उस वैभव से दूर रहते हैं। उस वैभव का उपयोग तो दूसरी बात है, स्पर्श भी नहीं करते है । अनन्त अतीन्द्रिय प्रात्मोत्थ आनन्द का रसास्वाद आने से उन वीतराग ----..:.------- ----- - -
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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