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________________ [ गो. प्र. चिन्तामणि ६८८] समवशरण में विद्यमान सात प्रकार के मुनियों की संख्या- तीर्थंकर केवली भगवान के समवशरण में केवली, पूर्ववर, शिक्षक, विपुलमति मन:पर्यय ज्ञानी, विक्रिया ऋद्धिधारी, अवधिज्ञानी तथा वादी इन सात प्रकार के मुनियों की जो संख्या बताई गई है वह समवशरण में रहने वालों की है या उनके तीर्थकाल में होने वालों की है ? समाधान-ऋषभदेव के समवसरण में जितने गणधारादि मुनि प्रत्यक्ष रहते थे, उन्हीं की संख्या बताई गई है। यह बात पद्मपुराण के चौथे पर्व में लिखी है । it तरह बाकी प्रत्येक तीर्थकरों के मुनियों की संख्या समझनी चाहिये । योगी जिन कितनी कर्म प्रकृतियों का क्षय करते हैं , भगवान ने घातिया कर्मों की ६३ प्रकृतियों का क्षय किया था । इनमें ५ ज्ञानावरण ६ दर्शनावरण, २८ मोहतीय तथा ५ अंतराय, मनुष्यायु को छोड़कर शेष तीन ग्रायु तथा १३ नाम कर्म की प्रकृतियाँ हैं । इस सम्बन्ध में बला टीका का यह कथन भी विचार है 'एदेसु सहि-कम्मेसु खीसु सयोगिजियो होदि -योगिकेवली a fiचि कम्मं खवेदि ।' (भाग १ पृ० २२३ ) इन कर्मों में साठ प्रकृति कर्मों के क्षय होने पर संयोगी जिन होता है । सयोग केवली किस कर्म का क्षय नहीं करते हैं । प्रश्न :-- सर्वत्र श्रागम में ६३ प्रकृतियों के क्षय को परम्परा प्रसिद्ध है, तब धवला टीका में ६० प्रकृतियों का क्षय क्यों कहा गया है ? उत्तर :- तत्वार्थ राजarfe में कर्मों के के न तथा साध्य इस प्रकार दो भेद कहे हैं। चरम शरीरी जीव के नरकायु, देवायु, तथा तिर्यञ्चाधु का सत्व न होने से बिना प्रयत्न के अभाव माना गया है। कहा भी है वो द्विविधो, यत्न साध्योऽयत्न साध्यश्चेति । तत्र चरमदेहस्य नरक तिर्यग्देवायुषामभावोऽयल विचार कर केवली के साध्य:' ( ६,३६१, अ० १० सुत्र २ ) अतएव सामान्य दृष्टि ६३ प्रकृतियों का अभाव कहा गया है । यत्न साध्य अर्थात् पौरूष द्वारा संपादित कर्माभाव को ध्यान में रखकर धवला टीका में ६० प्रकृतियों के अभाव से केवली पद की प्राप्ति प्रतिपादित की गई है । शेष रही श्रघाति कर्मों की ८५ प्रकृतियों में से ७२ प्रकृतियों का प्रयोग जीवन
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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