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________________ २४ ] [ गो. प्र. चिन्तामणि उत्तर :-जिस कर्म के उदय से शरीर की धातुएँ तथा उपधातुएँ अपने स्थान में स्थिर नहीं रहती, उसे अस्थिर नामकर्म कहते हैं । प्रश्न : प्रादेय नामकर्म किसे कहते है ? उत्तर :-जिस कर्म के उदय से शरीर में कान्ति होती है, उसे प्रादेय नामकर्म कहते हैं। प्रश्न :-अनादेय नामकर्म किसे कहते हैं ? .. उत्तर :----जिस कर्म के उदय से शरीर में कान्ति नहीं होती, उसे अनादेय नामकम कहते हैं। प्रश्न :- यशःकीति नामकर्म कहते हैं ? उत्तर :----जिस कर्म के उदय से संसार में जीव की प्रशंसा होती है, उसे वशःकीर्ति नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :-अयश कीर्ति नामकर्म किसे कहते हैं ? ..... उत्तर :-जिस कर्म के उदय से लोक में जीव की निन्दा होती है, उसे अयश कीति नामकर्म कहते हैं। प्रश्न :-तीर्थकरत्व कम किसे कहते हैं ? उत्तर :-जिस कर्म के उदय से तीर्थकरपद की प्राप्ति होती है, उसे तीर्थङ्कर नामकर्म ... कहते हैं । प्रश्न :-गोत्रकर्म किसे कहते हैं ? उसके कितने भेद हैं ? उत्तर :---जिस कर्म के उदय से जीव का, उच्च या नीच गोत्र में जन्म होता हैं, जो ... गोत्रकर्म कहते हैं । इसके दो भेद हैं- १. उच्चगोत्र, २. नीचगोत्र। .. प्रश्न :-उच्चगोत्र कर्म किसे कहते हैं ? ...... उत्तर :-जिस कर्म के उदय से उच्चगोत्र में जन्म होता है, उसे उच्चगोत्र कर्म कहते . . हैं। इससे लोकमान्य पूज्य गोत्र मिलता है । प्रश्न :-नीचगीन कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :---जिस कम के उदय से प्रारगी का लोक निन्द्य नीच कुल में जन्म होता है, - उसे नीचगोत्र कर्म कहते हैं। प्रश्न :--अन्तराम कर्म किसे कहते हैं ?
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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