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अध्याय: पहला
प्रश्न :-- इन्द्रियपर्याप्ति किसे कहते हैं ?
उत्तर :- श्राहार वर्गगा के परमाणुत्रों को इन्द्रिय के ग्राकाररूप परिणामावने को तथा इन्द्रिय द्वारा ग्रहण करने के कारणभूत जीव की शक्ति की पूर्णता को इंन्द्रिय पर्याप्त कहते हैं ।
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प्रश्न :-- श्वासोच्छवासपर्याप्ति किसे कहते हैं ?
उत्तर :- आहार वर्गमा के परमाणुत्रों को श्वासोच्छवासरूप परिणामावने के कारण• भूत जीव की शक्ति को पूरांता को श्वासोच्छवासपर्याप्ति कहते हैं ।
प्रश्न :-- भाषापर्याप्ति किसे कहते है ?
उत्तर :- भाषावर्गणा के परमाणुत्रों को वचनरूप परिणामावने के कारणभूत जीव की शक्ति की पूर्णता को भाषापर्याप्ति कहते हैं ।
प्रश्न : --- मनःपर्याप्ति किसे कहते हैं ?
उत्तर :- मनोवगंगा के परमाणुओं को हृदय स्थान में साठ पंखुड़ी के कमलाकार मनरूप परिमाने की तथा उसके द्वारा यथावत विचार करने की कारणभूत जीव की शक्ति की पूर्णता को मनःपर्याप्त कहते हैं ।
प्रश्न :- कितने इन्द्रिय वाले जीवों को कितनी पर्याप्तियाँ होती हैं ?
उत्तर :---
- एकेन्द्रियं के भाषा और मन के बिना चार पर्याप्तियां होती है । हीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय और असंज्ञी पंचेन्द्रिय के मन के बिना पनि पर्याप्तियां होती हैं । संज्ञीपंचेन्द्रिय के छहों पर्याप्तियां होती हैं। इन सब पर्याप्तियों के पूर्ण होने का काल अन्तर्मुहूर्त है और एक-एक पर्याप्ति का काल भी अन्तर्मुहूर्त हैं । तथा सबका मिलाकर भी श्रन्तमुहूर्त ही है । और पहले से दूसरे, तीसरे का इसी तरह हट्ट तक का काल क्रम से बडा बडा प्रन्मुहूर्त है । प्रश्न :- स्थिर नामकर्म किसे कहते हैं ?
उत्तर :- जिस कर्म के उदय से शरीर की धातुएँ ( रस, रुधिर, गांस, मेद, हाड,
मज्जा और शुक्र ) तथा उपधातुएं (वात, पित्त, कफ, शिरा, स्नायु, चाभ और जठराग्नि ) अपने-अपने स्थान में स्थिरता को प्राप्त होती है, उसे स्थिर नामकर्म कहते हैं ।
- अस्थिर नामकर्म किसे कहते हैं ?
प्रश्न :--