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________________ - AAMKinHEIGLAMINimadimanamainalisammu ६६० ] [ गो. प्र. चिन्तामणि १७. विमान (देव विमान), १८. भवन (नागेन्द्र भवन), १६. हाथी, २०. मनुष्य, २१. मनुक्षी (स्त्री), २२. सिंह, २३. बाग, २४, धनुष, २५. मेरु (महामेरू), २६. इन्द्र (देवेन्द्र), २७, देवांगना, २८. पुर (पट्टण), २६. गोपुर, ३०. चन्द्रमा, ३१. सूर्य, ३२. उत्तम घोड़ा, ३३. पंखा, ३४, बांसुरी (मुरली), ३५. बीणा, ३६. मृदंग, ३७ मालाएं (दो पुष्प माला), ३८. रेशमी वस्त्र, ३६. दुकान, ४०. शेखर पट्ट-शीर्षाभूषण (मुकुट-किरीट) ४१. हार (कंठिका वली मौक्तिक माला) ४२. पदक (चूड़ामरिग), ४३. ग्रेवयक, ४४. प्रालम्ब, ४५. केयूर (भुजबन्द बाजूबन्द}, ४६. अंगद, ४७. कटिसूत्र (करधनी), ४८. दो मुद्रिका (पवित्र अंगूठी), ४६. कुन्डल कर्ण भूधरण, ५०. कर्णपुर, ५१, दो बकरण (कड़ा), ५२. मंजीर (नूपुर-घुघरू), ५३. कटक, ५४. पट्ट (भाल पट्ट), ५.५. सूत्र (ब्रह्म सुत्र), ५६. फल भरित उद्यान, ५७. पके वृक्षों से सुशोभित खेत (फल भार से नन्न हुई शाली का खेत), ५८. रत्नदीप, ५६. बज्र, ६०. पृथिवी, ६१. लक्ष्मी, १२ सरस्वती, ६.३. कामधेनु, ६४. वृषभ (बैल), ६५. चूड़ामरिण, ६६. महानिधियां, ६७, गृहांग कल्प वृक्ष, ६.. भाजनांग क०, ६६. बोजनांग क०, ७०. पानांग (मद्यांग), ७१. वस्त्रांग क०, ७२. भूषणांग क०, . ७३. माल्यांग (कुसुमांग) क०, ७४. दीपांग क०, ७५. ज्योतिरांग क०, ७६. सूर्याङ्ग क०, ७७. सुवर्ण, ७८, जम्बूवृक्ष, ७६. गरुरण, ८०. नक्षत्रों का समूह, ५१. तारागरण, ८२. राजभवन, ८३. अंगारक (शनि.) गृह, ८४. रविग्रह, ८५. चन्द्रग्रहः ८६. मंगलग्रह, २७. बुध, ८८. गुरु, ८६..शुक्र, ६०, राहु, ६१. केतु, १२. सिद्धार्थ वृक्ष, ६३. अशोक वृक्ष, ६४. स्ल सिंहासन, ६५. छत्रत्रय, ६०. भामंडल (प्रभामंडल), ६७. दिव्यध्वनि, ६८. पुष्पवृष्टि, ६६. चमर, १००. देवदुन्दुभि, १०१. झारी (शृगार), १०२, कलश, १०३. ध्वजा, १०४. छत्र, १०५. स्वास्तिक (सुप्रतिष्ठ-साथिया), १०६. चमर, १०७. दर्पण, १०८, पंखा (ताल व्यंजन तालवृन्त), इस प्रकार १०६. मुख्य लक्षण तथा मरिकादि, १०० व्यंजन अर्थात् सामान्य लक्षण, ये सब मिलकर १००८ सुलक्षण विद्यमान थे। (देखो महा पुल पूर्व १५२ लोक ३७ से ४४) । प्रश्न :--क्या निमित्त ज्ञान सच्चा है ? उत्तर :--निमित्त ज्ञान के शास्त्र और शास्त्रज्ञ-महाकवि कहते हैं---इन । मनोहर और श्रेष्ठ लक्षणों से व्याप्त हुआ भगवान का शरीर ज्योतिषी देवों से भरे - m MORE
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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