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अध्याय : पाठवां
सात प्रकार की देवसेना का स्वरूप
वे देव किसका गुण किस स्वर में गाते
हये चलते थे?
प्रतिनारायण के बलबीर्य का गुणगान करती
थी, तथा सस्य करती जाती थी। चौथीं-पैदल रूपधारी देवों की सेना मध्यम स्वर में चक्रवर्ती की विभूति बल
वीर्यादि का गुणगान करती थी। पंचवीं--वृषभ रूपधारी देवों की सेना पंचम स्वर में लोकपाल जाति के देवों का
गुणानुवाद करती थी। चरम शरीरी मुनियों
का भी गुणगान करती थी। छठवीं-गंधर्व रूपधारी देवों की सेना धैवत स्वर में गणधर देव तथा ऋद्धिधारी
मुनियों का गौरवपूर्ण ज्ञान करती थी। सातवीं-नत्यकारिणी देवों की सेना निषाद स्वर में तीर्थंकर भगवान के
नियालीस गुरगों का और उनके पुण्य जीवन का मधुर गान करती थी। .
प्रश्न :-ऐरावत हाथी का क्या स्वरूप है ?
उत्तर :-ऐरावत हाथी--सौधर्मेन्द्र ने एक लाख योजन के ऐरावत हाथी पर शची के साथ बैठकर अनेक देवों से समलंकृत हो अयोध्या को प्रस्थान किया। ऐरावत गज का वर्शन अद्भुत रस को जागृत करता है। दैविक चमत्कार का वह अत्यन्त मनोज्ञ रूप था। विक्रिया शक्ति संपन्न देवों में कल्पनातीत शक्ति रहती है। . इनका शरीर औदारिक शरीर की अपेक्षा : अत्यन्त सूक्ष्म होता है। उस सूक्ष्म परिणमन प्राप्त बैंक्रियिक शरीर का स्थूल रूप दर्शन ऐरावत हाथी के रूप में होता
था । वह गज लौकिक गजेन्द्रों से भिन्न था । देवसामर्थ्य का सुमधुर प्रदर्शन था। . उस गज के बत्तीस मुख थे । प्रत्येक मुख में पाठ-पाठ दांत थे। प्रत्येक दात पर
एक-एक सरोवर था । प्रत्येक सरोवर में एक-एक कमलिनी थी। एक-एक कमलिनी में बत्तीस-बत्तीस कमल थे । कमल के प्रत्येक पत्ते पर बत्तीस-बत्तीस देवांगनाएँ मधुर .. नृत्य कर रही थीं। इस प्रकार २५६ दात, ८१६२ कमला; २६२१४४ कमल पत्र तथा