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________________ अध्याय : पहला । [ २१ प्रश्न :-सुभग नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :---जिस कर्म के उदय से अन्य जीवों को अपने से प्रीति होने योग्य शरीर होता है, उसे सुभग नामकर्म कहते हैं। प्रश्न :-दुर्भग नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--जिस कर्म के उदयं से रूपादि गुराणों से युक्त होने पर भी दूसरे जीवों को अपने से प्रीति नहीं होती है, उसे दुर्भग नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :--सुस्वर नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तह :--जिस कर्म के उदय से स्वर (अावाज) सुरीला होता है, उसे सुस्वर नामकर्म - कहते हैं। प्रश्न :----दुस्वर नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :---जिस कर्म के उदय से स्वर अच्छा नहीं होता है, उसे दुस्वर नामकर्म कहते हैं। प्रश्न :-शुभ नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--जिस कर्म के उदय से मस्तक प्रादि अवयव सुन्दर हो, उसे शुभ नामकर्म कहते हैं। प्रश्न :--अशुभ नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :---जिस कर्म के उदय से शरीर के अवयव देखने में सुन्दर नहीं होते हैं, उसे .... शुभ नामकर्म कहते हैं। प्रश्न :--सूक्ष्म नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :----जिस कर्म के उदय से दूसरों को नहीं रोकने वाला और दूसरों से नहीं रुकने . बाला शरीर प्राप्त होता है, उसे सूक्ष्मशरीर नामकर्म कहते हैं। प्रश्न :- बादरनाम कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--जिस कर्म के उदय से दूसरों को रोकने वाला तथा दूसरों से रुकने वाला __ स्थूल शरीर प्राप्त होता है, उसे बादर नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :---पर्याप्ति नामकर्म किसे कहते हैं ? ... . उत्तर :--जिस कर्म के उदय से अपने योग्य पर्याप्तियां पूर्ण होती हैं, उसे पर्याप्ति नामकर्म कहते हैं। RAMB २२rior S
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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