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________________ ६४० ] । गो. प्र. चिन्तामणि शुकः पंजरमध्यास्ते, काकः परुषनिस्वनः । लोकः प्रतिष्ठा जीवानां, श्लोकः पाद्योऽक्षरस्युतः ॥१५६२।। कः पंजर मध्यास्ते'। इसमें 'शु' शब्द को जोड़करः माता कहती हैं, शुक (सोता) पिंजरे में रहता है। दूसरे प्रश्न के उत्तर में माता 'का' शबद जोड़कर कहती हैं कठोर स्वर वाला 'काक' पक्षी होता है। तीसरे प्रश्न के उत्तर में माता 'लो' शब्द को जोड़कर कहती हैं, जीवों का प्राश्रय 'लोक' है । चौथे प्रश्न के उत्तर में माता कहली हैं 'श्लो' शब्द को जोड़ने से अक्षर च्युत होने पर भी श्लोक पठनीय है । तीनों देशों के क्रम में शाम छ .. . कः समुत्सृज्यते धान्ये, घटयत्यम्ब को घटम् ? वृषान्धशतिकः पापी बदाय रक्षरः पथक् ? ॥१५६३।। माता ! धान्य में क्या छोड़ दिया जाता है ? घट को कौन बनाता है ? वृषान् अर्थात् चूहों को कौन पापी भक्षण करता है ? इसका उत्तर पृथक्-पृथक् शब्दों में बताइये जिनके प्रादि के अक्षर पृथक्-पृथक हों ? __माता ने उत्तर दिया 'पलाल' धान्य में छोड़ा जाता है । 'कुलाल कुम्भकार घट को बनाता है 'बिडाल' चूहों को स्वाता है। इन उत्तरों में प्रारम्भ के दो शब्द पृथक्-पृथक् होते हुये अंत का अक्षर 'ल' सब में है। .. प्रगट रूप से अनेक देवियां माता की बड़े विवेक पूर्वक सेवा करती थीं। महापुराण में यह महत्त्वपूर्ण कथन आया है निगूढं च श्ची देवी सिषेवे लिसाप्सराः । मधोनाघ-विनाशाय प्रहिता सा महासती ॥१५६४॥ अपने समस्त पापों का नाश करने के लिये इन्द्र के द्वारा भेजी गई इन्द्राणी ___ अनेक अप्सरानों के साथ माता की गुप्त रूप से सेवा करती थी। प्रभु की माता में प्रारम्भ से ही लोकोत्तरता थी। अब जिनेन्द्र के गर्भ में आने से वह सचमुच में जगत की माता या जगदम्बा हो गई । उसकी गरिमा का कौन वर्णन कर सकता है ? प्रश्न :-गर्भ मे भगवान कैसे थे?. उत्तर :-गर्भ कल्याणक के वर्णन के प्रसंग में माता के गर्भ में विराजमान तथा सूर्य सदृश शीघ्र ही उदय को प्राप्त होने वाले उन भगवान की अवस्था पर प्रकाश डालने वाला धर्मश भ्युदय का यह पद्य कितना भाव पूर्ण है ?
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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