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________________ ६३४ ] [ गो. प्र. चिन्तामणि प्रश्न :-~मिनेन्द्र की मां को सेवा देवियां किस प्रकार करती हैं ? उत्तर-जिनेन्द्र की जननी की अनेक देवांगनाएँ सेवा करती रहती हैं-धर्शशर्माभ्युदय में लिखा है कि उनमें से श्री देवी सेवार्थ, राज भवन में पहुँची और भगवान के पिता से कहने लगी-- निर्जरासुर-मरोरगेषु ते कोऽधुनापिगुरपसाम्यमच्छतिः । अग्रतस्तु सुतरा बनोपुरुस्तवं जगत्त्रयः पुरोर्भविष्यसि ।।१५५३॥ देव, असुर, मानव तथा नागकुमारों में अब कौन अापके गुणों से समानता को प्राप्त करेगा, क्योंकि अवप. त्रिलोक के गुरु के भी गुरु होंगे। इसके पश्चात् वे देवियां माता की सेवा के लिए अन्तःपुर में प्रवेश करती हैं, अशा कवि ने लिखा है कि कुन्डल पर्वत पर निवास करने वाली चूलावती, मालनिका, नवमालिका, त्रिशिरा, पुष्पचूला. कनकचित्रा, कलकादेवी तथा वारुणीदेवी नाम की अष्टदिक्कन्यकाएं इन्द्र की आज्ञा से जिनमाता की सेवार्थ गई थी। इसी तरह जिनमाता की सेवा करने वाली ५६ देवांगनाओं के नाम१. कल्पवासी देवों के देवेन्द्र की इन्द्राणियाँ १२ । इनमें से २. भवनवासी देवों के देवेन्द्र की इन्द्राणियाँ २० । कुलाचल ३. व्यन्तर देवों के देवेन्द्र की इन्द्रारिणयाँ १६ । वासिनी ४. ज्योतिष्क देवों के देवेन्द्र की इन्द्ररिणयाँ: २ श्री देवी ५. कुलाचल-वासिनी श्री देवी आदि देवियाँ ह्री देवी ति देवी . .. . . . . . कीतिदेवी, बुद्धिदेवी, लक्ष्मीदेवी ये छह: देवियां माता के गर्भ शोधन का। कार्य करती है। शेष, देवियां माता की सेवा प्रगट रूप से तथा प्रस्छन (गुप्त) रूप से करती रहती हैं, ऐसा पुराण में लिखा है। प्रश्न:-तीर्थकर की माता का पूण्यः किस प्रकार का है ? उत्तर:---जिन माता का अलौकिक पुण्य-पूर्व पश्चिम, दक्षिण, उत्तर इन चारों दिशाश्त्रों में सामान्य दृष्टि से समानला होते हुये भी पूर्व दिशा को विशेष महत्व इस लिये दिया जाता है कि भूमंडल में अपना उज्ज्वल प्रकाश प्रदान करने वाला भास्कर । . . . diesdesiAAN.GANDKITEMPERAT
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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