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________________ अध्याय : पहला ] । उत्तर :-जिस कर्म के उदय से शरीर में रस (का ज्ञान) उत्पन्न होता है, उसे रस नामकर्म कहते हैं । इस रस के ५ पांच भेद हैं - खट्टा, खारा, मीठा, कडवा, कपायला। प्रश्न :--गंध नामकर्म किसे कहते हैं ? और उसके कितने भेद हैं ? उत्तर :-~-जिस कर्म के उदय से शरीर में गंध का ज्ञान प्रगट होता है, उसे गंध नामकर्म कहते हैं । इसके दो भेद हैं -- सुगन्ध और दुर्गन्ध । प्रश्न :---दर्ण नामकर्म किसे कहते हैं ? उतर:-जिस कर्म के उदय से शरीर में (रूप) वर्ग होता है, उसे वर्ण नामकर्म कहते हैं । इसके ५ पांच भेद हैं - काला, पीला, नीला, लाल और सफेद । ET :- नाक शिले कहते हैं और उसके कितने भेद हैं ? उत्तर ---जिस कर्म के उदय से विग्रहगति में (मरण से) पूर्व के शरीर के आकार में प्रात्मा के प्रदेश रहते हैं, उसे पानुपूर्ण नामकर्म कहते हैं । इसके चार भेद हैंनरकगत्यानुपूर्व्य, तिर्यञ्चगत्यानुपूर्व्य, मनुष्य गत्यानुपूर्य और देवगत्यानुपूर्व्य, जिस समय मनुष्य या तिर्यच्च मरकर नरफगति की ओर जाता है, उस समय उसके आत्मा के प्रदेशों का आकार वैसा ही बना रहता है, जैसा उसके पूर्व शरीर का प्राकार था, जिसे यह छोडकर आया है, उस आकार को नरकगत्यादिनुपूर्दी कहते हैं । इसी तरह अन्य जान लेना । प्रश्न :-अगुरूलघु नामकर्म किसे कहते हैं ? '. उत्तर :--जिस नामकर्म के उदय से जीव का शरीर लोहे के गोले की तरह भारी और पाक की रूई की तरह हल्का नहीं होता, उसे अगुरूलघु नामकर्म कहते हैं। प्रश्न :-उपघात नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :-जिस कर्म के उदय से अपने ही घातक (अपना ही घात करने वाले) .. प्रांगोपांग होते हैं, उसे उपवात नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :-परघात नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :-जिस कर्म के उदय से दूसरे के घातक (धात करने वाले) प्रांगोपांग होते है, उसे परमात नामकर्म कहते हैं।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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