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________________ अध्याय : पाठवां नाभिराज-मनु, कुलकरों में १४ वा कुलकर । श्रेयांसराजा-दातृशिरोमरिए हस्तिनापुर के राजा। भरत चक्रवर्ती-श्री ऋषभनाथ भगवान के ज्येष्ठ पुत्र, भावों की निर्मलता में विख्यात हुये, इन्होंने अंतर्मुहूर्तकाल में केवल ज्ञान प्राप्त किया । बाहुबली-श्री ऋषभनाथ भगवान् के पुत्र, प्रथम कामदेव तप में प्रसिस हुए । एक वर्ष कायोत्सर्ग आसन से खड़े रहे थे । रामचन्द्र--अष्टम बलिभद्र । हनुमान-१८वां कामदेव, के रूप में प्रसिद्ध हुए। रावण-वां प्रतिनारायण, यानी पुरुषों में प्रसिद्ध हुये। . कृष्ण-वां नारायण । पार्श्वनाथ--स्वामी, तीर्थकर, उपसर्ग केवली। . महादेव-~~११वां रुष्ट्र, पार्वती का पति । . प्रश्न--कुलकर-मनु या युगादि पुरुषों का कार्य क्या था? उत्तर--भोगभूमि का अंत होते समय तथा कर्मभूमि के प्रारम्भकाल में विशेष परिवर्तन देखकर चकित और चिंतित मानव समाज को निराकुल बना ठीक मार्ग का प्रदर्शन करने वाले चौदह महापुरुष , होते हैं । ,इनको 'कुलकर कहते हैं । महापुराण में लिखा है कि 'ये सब कुलकर अपने पूर्वभव विदेह क्षेत्र में ऊच्चकुल दाले महापुरुष थे, उन्होंने सम्यकत्व ग्रहण करने के पूर्व में पुण्यप्रद पात्र दान आदि उज्जवल कार्यों के द्वारा भोग भूमि की आयु बांध ली थी। पश्चात् जिनेंद्र भगवान् के समीप क्षायिक सम्यक्त्व प्राप्त किया । और विशेष श्रुत शान की प्राप्ति की तथा आयु के अंत होने पर मरण कर वे इस भरत क्षेत्र में उत्पन्न हुये थें । इनमें से कितने ही अवधिज्ञान रूपी नेत्र के धारक थे और कितने ही जाति स्मरण युक्त थे, इसलिये उन्होंने विचार कर प्रजा के लिये उपकारी कार्यों का उपदेश दिया था (महापुराण पर्व 3 श्लोक २०७-२१) जिनसेन स्वामी ने कहा हैं..-' प्रजानां जीवनोपायमननान-मनवोमताः । . प्रार्याणां कुलसंस्स्यायकृतेः कुलकरा इमे ॥१५१३॥ कुलानां धारणदेते मताः कुलधरा इति । युगादिपुरुषाः प्रोक्ता युगादौ प्रभविष्ययः ॥१५१४॥ ...'
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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