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[ गो. प्र. चिन्तामगिए मूलाचार में यह भी लिखा है कि-- . ..... प्राजोदिसोति देव सलागपुरिसा पहोंति खलु रिणयमा है . . .
तेसि अतरभवे. भयरिंगज्जं .रिगडबुदोगमणं ॥१५०६॥
भवनत्रिक देवों में से आकर कोई शलाका पुरुष नहीं होते। यही बात त्रिलोकसार में भी इस प्रकार कही गई है। . . .
पर तिरिय-दोहि तो भवतियायोय रिणग्गया जोधा । . ... . गलहते ते. पदवि . तेनटि-सलागपुरिसाणं ॥१५१०॥
अर्थ---मनुष्य तथा तिर्यञ्च गति से निकले तथा भवनत्रिक से निकलें.जीव वेसठ शलाका पुरुषों की पदवी को नहीं प्राप्त करते हैं । ..
रिपधुदिगमरणे रामसरगयतिस्थयर-कवट्टि ते । प्रणदिसणुसरबासी तदो चुदा होति. भयणिज्जा ॥१५११॥
अतुदिश तथा अनुत्तर विमानवासी देव चय करं बलदेव, तीर्थकर तथा बस पक्षियों को मार्ग सभाते हैं ! . ... ...
" उपरोक्त प्रागम से यह बात स्पष्ट होती है कि नरक से चय कर तीर्थङ्कर पदवी के सिवाय चक्रवर्ती, बलदेव, वासुदेव तथा प्रतिवासुदेव नहीं होते हैं। तीसरे नरक से निकला हुआ जीव तीर्थङ्कर हो सकता है । भवनत्रिक से चय कर तीर्थकर चक्रवर्ती प्रादि शलाका पुरुष नहीं होते। भावों की विचित्रता है कि भवनत्रिक रूप देवपर्याय वाला जीव तीर्थङ्कर नहीं होता और तीसरे नरक तक का नारकी तीर्थङ्कर हो सकता है । विमानवासी देव शलाका पुरुष हो सकता है । तिलोयपत्ति में लिखा है :
तिस्थयरा-तग्गुरप्रो-चक्की-बलकेसि-रुस सारहा । अंगज-कुलयर पुरिसा भथिया सिझति णियमेण ॥१५१२॥
तीर्थङ्कर, उनके माता-पिता, चक्रवर्ती, बलदेव, नारावरण, प्रतिनारायण, रुद्र , नारद, कामदेव और. कुलकर ये सभी भव्य रहते हैं और नियम से मोक्ष प्राप्त करते हैं।
प्रश्न- जगत में प्रसिद्ध पुरुष के नाम कौन से है ?
उत्तर--विशेष प्रसिद्ध हुए महापुरुषों के नाम-इन १६६ महापुरुषों में ये जगत् में विशेष प्रसिद्ध हुये हैं :--
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