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________________ अध्याय: पहला ] प्रश्न :- - संस्थान नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से शरीर का आकार बनता है, उसे संस्थान नामकर्म कहते हैं । प्रश्न : - इस संस्थान नामकर्म के कितने भेद हैं ? उत्तर :- समचतुरस्त्र संस्थान, न्यग्रोधपरिमंडल संस्थान, स्वातिसंस्थान, कुब्जक संस्थान, वामनसंस्थान और हुंडकसंस्थान - ये छह भेद हैं । प्रश्न :- समवतुरस्त्र संस्थान नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर : --- जिस कर्म के उदय से शरीर का आकार ऊपर, नीचे तथा बीच में समान " विभाग से जैसे सांचे में ढला हो, वैसे होता है, उसे समचतुरस्त्र संस्थान नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :- न्यग्रोधपरिमंडलसंस्थान नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से शरीर का ग्राकार सर्प की बामि ( बील) की तरह ऊपर पतला और नीचे मोटा होता है, उसे स्वातिसंस्थान नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :-- कुब्जक संस्थान नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर : - जिस कर्म के उदय से शरीर के बीच के भाग में बहुत से पुद्गलों का समूह इकट्ठा होता है अर्थात् पीठ कुछ उटी रहती है, उसे कुब्जक संस्थान नामकर्म कहते हैं । [ १७ प्रश्न : - - वामनसंस्थान नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से शरीर बोना होता है, उसे वामनसंस्थान नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :- हुंडकसंस्थान नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--- - जिस कर्म के उदय से शरीर के अङ्गोपाङ्ग किसी खास प्रकार के न होकर बेडौल होते हैं, उसे हुडकसंस्थान नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :--- - संहनन नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से हड्डियों के बन्धन में विशेषता होती है, उसे संहनन नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :- इस संहनन नामकर्म के कितने भेद हैं ? ..
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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