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________________ [ गो. प्र. चिन्तामणि प्रश्न :-ौदारिक शरीरंगोपांग किसे कहते हैं ? उत्तर :--जिस कर्म के उदय से श्रीदारिक शरीर के अंगों की और उपांगों की रचना होली है, उसे सौताकि गरी गोमांग कहते हैं। प्रश्न :--वैक्रियक शरीरांगोपांग किसे कहते हैं ? . उत्तर :--जिस कर्म के उदय से वैक्रियक शरीरांगोपांगों की रचना होती है, उसे ___ वैक्रियक शरीरांगोपांग कहते हैं। प्रश्न :--ग्राहारक शरीरांगोपांग किसे कहते हैं ? उत्तर :--जिस कर्म के उदय से आहारक शरीरांगोपांगों की रचना होती है, उसे र श्राहारक शरीरांगोपांग कहते हैं । .. प्रश्न :-~निर्माण नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--जिस कर्म के उदय से अंगोपांग की यथास्थान और यथाप्रमारप रचना होती. है, उसे निर्माण नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :--बन्धन नामकर्म किसे कहते हैं. ?. उत्तर :---शरीर-नामकर्म के उदय से ग्रहण किए हुए पुद्गल स्कंधों का परस्पर मिलन । जिस कर्म के उदय से होता है, उसे बन्धन-नामकर्म कहते हैं । प्रश्न :--इस बन्धन-नामकर्म के कितने भेद हैं ? उत्तर :--बन्धन नामकम के ५. पांच भेद हैं । औदारिकबन्धन नामकर्म, वैक्रियकबंधन नामकर्म, आहारकवन्धन नामकर्म, तेजसबन्धन नामकर्म और कार्माणबन्धनः नामकर्म । प्रश्न :---ौदारिक बन्धन नामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से औदारिक शरीर के परमाणु दीवार में लगे इंट और गारे की तरह छिद्र सहित परस्पर सम्बन्ध को प्राप्त होते हैं, वह औदारिक बन्धन नामकर्म है। इसी प्रकार अन्य भेदों का लक्षगा जानता। प्रश्न :-संघातनामकर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--जिस कर्म के उदय से. औदारिकांदि शरीरों के प्रदेश. परस्पर छिद्र रहित . . . . . एकमेक होते हैं, उसे संघात नामकर्म कहते हैं। इसके पांच भेद हैं। औदारिक संघात नामकर्म आदि । ह .
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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