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अध्याय : पहला ]
[ १५ उत्तर :---शुभ-तेजस शरीर पप्ठम गुणस्थानवी वीतरागी साधु के होता है। जब मुनि
राज प्रसन्नचित्त हो गये हो तो सीधी (दाहिनी) भुजा से निकलकर १२ योजन
तक सुभिक्ष कर देता है, शुभ्र वर्ण का होता है और सूक्ष्म होता है । प्रश्न :--अशुभ-तैजस किसे कहते हैं ? उत्तर :-यह भी निर्गन्थ साधु के होता है, लाल वर्मा का होता है, महाभयंकर होना
है। जब मुनिराज पूर्व पापकर्म के उदय से क्रोधित हो जाते हैं और अपने . स्वरूप से च्युत होते हैं, तब उनके उल्टी (बायों) भुजा से अशुभ-तैजस
निकलता है और १२ योजन तक सबको जलाकर भस्म कर देता है और अन्त में मुनिराज को भी अला देता है। ये दोनों शरीर लब्धि-विशेष साधु
के होते हैं। प्रश्न :--पांचों शरीरों को सूक्ष्मता बताइये ? उत्तर :--. उक्त पांचों ही शरीर एक की अपेक्षा एक सूक्ष्म हैं । प्रौदारिक की अपेक्षा
वैक्रियक सूक्ष्म, वैक्रियक की अपेक्षा आहारक सूक्ष्म, आहारक की अपेक्षा ... तेजस सूक्ष्म और तैजस की अपेक्षा कार्माण सूक्ष्म होता है । . प्रश्न :--प्रदेशों की अपेक्षा ये पांचों ही शरीर कैसे हैं ? उत्तर :---ौदारिक शरीर की अपेक्षा असंख्यात गुगो प्रदेश (परमाणु) बैंक्रियक शरीर
में और वैक्रियक की अपेक्षा असंख्यात गुने प्रदेश याहारक शरीर में और
आहारक शरीर की अपेक्षा अनन्तगुणे परमाणु तैजस शरीर में और तेजस . शरीर की अपेक्षा कार्मारा शरीर में अनन्तगुरणे परमाणु होते हैं । प्रश्न :-अङ्गोपाङ्ग नामकर्म किसे कहते हैं ?.. उत्तर :---जिस कर्म के उदय से अंग और उपांगों की रचना होती है, उसे अंगोपांग
- नामकर्म कहते हैं। प्रश्न :- इसके कितने भेद हैं ? उत्तर --ौदारिक शरीरांगोपांग, वैक्रियक शरीरांगोपांग और आहारक शरीरांगो
. पांग--ये तीन भेद हैं । प्रश्न : अङ्ग और उपाङ्ग कितने प्रकार के हैं ? ... . उत्तर :--दो हाथ, दो पांव, नितम्ब, पीठ, वक्षःस्थल और मस्तकं ये ८ प्रकार के अंग :-.. , इनको छोड़कर बाकी सब उपांग हैं। .